नई दिल्लीः दुनियाभर के देश डिजिटल करंसी से अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की तैयारी में हैं। देश में मंगलवार को डिजिटल करंसी ई-रुपया की शुरुआत के साथ नए युग का आगाज हुआ। बजट में की गई घोषणा के अनुसार रिजर्व बैंक ने इस योजना का पायलट परीक्षण किया। वहीं, अमरीकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के अनुसार दुनिया के दस देशों के केंद्रीय बैंक ने डिजिटल करंसी (सीबीडीसी) का पूर्ण इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसमें बहामास, नाइजीरिया, एंटीगुआ, डॉमनिका, ग्रेनेडा, मॉन्टस्ट्रीट, सेंट किट्स, सेंट लुसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनडाइन्स जैसे कैरेबियाई देश शामिल हैं। वहीं 109 देश इसे लागू करने की तैयारी में हैं या पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसपर काम कर रहे हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ द बहामास अक्तूबर 2020 में दुनिया का पहला केंद्रीय बैंक बन गया जिसने सीबीडीसी को लॉन्च किया। आरबीआई के अनुसार देश में 100 रुपए के एक नोट को छापने पर 15 से 17 रुपए की लागत आती है। एक नोट करीब चार साल तक चल पाता है। इसके बाद केंद्रीय बैंक को दोबारा नोट छापने पड़ते हैं, जिस पर हजारों करोड़ रुपए की लागत आती है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 में 4.19 लाख अतिरिक्त नोट छापे थे जिसके जिए उसे हजारों करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। डिजिटल करंसी का चलन बढ़ने के साथ यह लागत लगभग खत्म हो जाएगी। अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, जी-20 देशों के समूह में से 19 देश डिजिटल मुद्रा की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। वहीं अमरीका, ब्रिटेन और मेक्सिको अभी इस पर शोध कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 105 देशों की वैश्विक जीडीपी में 95 फीसदी हिस्सेदारी है। मई 2020 में सीबीडीसी पर विचार करने वाले देशों की संख्या मात्र 35 थी, जो अब बढ़कर 100 हो गई है। यह एक वाउचर है जिसे हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यानी केवल वही इसका इस्तेमाल कर सकेगा, जिसके लिए यह जारी किया गया है। ई-रुपी वाउचर जारी होने के बाद इसका इस्तेमाल एक ही बार किया जा सकता है। यह कैशलेस और कॉन्टैक्टलैस है। ई-रुपी लाभार्थी के मोबाइल पर भेजा जाएगा। यह क्यूआर कोड या एसएमएस कोड के रूप में होगा। इन्हें स्कैन किया जा सकेगा। लाभार्थी के वेरिफिकेशन के लिए एक कोड लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। वेरिफिकेशन होने पर वाउचर रिडीम हो जाएगा और तुरंत भुगतान हो जाएगा। सीबीडीसी में कैश हैंडओवर करते ही इंटरबैंक सेटलमेंट की जरूरत नहीं रह जाएगी।