नई दिल्ली : भारतीयों में दिल की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। अब तक माना जाता रहा है कि धमनियों (आर्टरीज) का डायमीटर कम होने के कारण लोग कोरोनरी आर्टरी डिजीज (एक हृदय रोग) के शिकार होते हैं, लेकिन एक नई स्टडी इस दावे को खारिज करती है। दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च के मुताबिक, व्यक्ति के शरीर का सरफेस एरिया (पृष्ठीय क्षेत्रफल) कम होने की वजह से ऐसा होता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) एक ऐसा हृदय रोग है, जिसमें दिल की जरूरी धमनियां डैमेज हो जाती हैं। इसकी सामान्य वजह धमनियों में फैट का जमना है। इससे ब्लड फ्लो में कमी आती है, जो सीने में दर्द से लेकर हार्ट अटैक तक का कारण बन सकता है। जर्नल ऑफ इंडियन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में छपी इस स्टडी में 250 लोगों को शामिल किया गया था। अस्पताल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. जेपीएस साहनी ने बताया कि प्रतिभगियों में से 51 प्रतिशत को हाई ब्लड प्रेशर और 18 प्रतिशत को डायबिटीज की बीमारी  थी। वहीं 4 प्रतिशत धूम्रपान के आदी थे, 28 प्रतिशत को हाई कोलेस्ट्रॉल व फैट था और 26 प्रतिशत के परिवार में दिल की बीमारी की हिस्ट्री थी। रिसर्चर्स ने पाया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की रक्त वाहिकाओं का औसतन डायमीटर काफी कम होता है। हालांकि, बॉडी सरफेस एरिया (बीएसए) के सामने दोनों की ही धमनियों के डायमीटर का मान महत्वपूर्ण नहीं होता है। दुनियाभर के एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि एशियाई लोग, खासकर भारतीयों को धमनियों का डायमीटर कम होने के चलते इनमें फैट डिपॉजिट होने का खतरा ज्यादा होता है। पर यह स्टडी साबित करती है कि भारतीय लोगों की धमनियां छोटी नहीं होती हैं। उन्हें सीएडी का रिस्क शरीर के सरफेस एरिया कम होने की वजह से होता है।