शर्म-अल-शेख : विश्व के नेता मंगलवार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं। इस साल मिस्र में अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ता में मांग उठी है कि जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां इस धरती को पहुंचाए गए नुकसान के ऐवज में शुल्क अदा करें। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सोमवार को चेतावनी दी कि मानव जाति तेजी से जलवायु संबंधी संकट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने और बारबाडोस के प्रधानमंत्री मियां मोटले जैसे अन्य नेताओं ने कहा कि समय आ गया है कि जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां उस कोष में योगदान दें जिससे कमजोर देशों की जलवायु संबंधी नुकसान से निपटने के लिए वित्तीय सहायता देने में मदद की जा सकेगी। पहली बार ऐसा हुआ है कि इस साल संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में प्रतिनिधि विकासशील देशों की इन मांगों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि अमीर, सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले देश जलवायु परिवर्तन से उन्हें हुए नुकसान के ऐवज में मुआवजा दें। जलवायु वार्ता में इसे ‘नुकसान और क्षतिपूर्ति’ कहा जाता है। अमरीका में मध्यावधि चुनाव का भी मंगलवार की वार्ता पर असर पड़ सकता है। अनेक पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका में डेमोक्रेटों की हार होने की स्थिति में राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए उनके महत्वाकांक्षी जलवायु एजेंडा को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। मिस्र के जेल में बंद प्रतिष्ठित लोकतंत्र समर्थक नेता अला आब्देल-फतह के भविष्य को लेकर भी सम्मेलन में चर्चा हो रही है। फतह ने लंबे समय से चल रही अपनी भूख हड़ताल तेज कर दी है और उनके परिवार ने दुनिया के नेताओं से उनकी रिहाई में मदद की गुहार लगाई है। अला आब्देल-फतह ने सम्मेलन के पहले दिन रविवार को अपने अनशन को आगे बढ़ाते हुए पानी पीना भी बंद कर दिया। परिवार के मुताबिक उन्होंने कहा कि अगर रिहा नहीं किया गया तो जान दे देंगे। असंतोष को दबाने के मिस्र के लंबे इतिहास के कारण सीओपी27 नामक इस वार्षिक सम्मेलन की उसकी मेजबानी पर विवाद खड़ा हो गया है।