गुवाहाटी : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज बृहस्पतिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित लाचित बरफुकन कें जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने मखमली गामोचा, मखमली चेलेंग, लाचित की कांस्य प्रतिमा और एक पारंपरिक आहोम हेंदांग प्रदान करके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने भाषण में इतिहास के पुनर्लेखन पर विशेष जोर दिया। महानायक के प्रति मुख्यधारा के इतिहासकारों की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए शाह ने इतिहास के छात्रों के साथ-साथ देश के इतिहासकारों से शोध करने और आने वाले दिनों में नए इतिहास के पाठ तैयार करने का आग्रह किया। कारण कि कोई भी राष्ट्र तब तक महान नहीं हो सकता जब तक उसे अपने इतिहास पर गर्व न हो।केंद्रीय गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री से लाचित की वीरगाथा को देश की विभिन्न भाषाओं में पुस्तक रूप में प्रकाशित करने का आग्रह किया ताकि कथा का प्रसार हो सके । उन्होंने मुख्यमंत्री से इस उद्देश्य के लिए हिंदी सहित 10 अन्य भाषाओं का चयन करने का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लाचित बरफुकन जैसे वीर योद्धा के बिना आज भारत में पूर्वोत्तर का स्थान नहीं होता। लाचित बरफुकन ने न केवल पूर्वोत्तर बल्कि पूरे दक्षिण पश्चिम एशिया की भाषा और संस्कृति की रक्षा की। इस महान वीर ने मुगलों का विरोध किया और पूर्वोत्तर के साथ-साथ पूरे दक्षिण पश्चिम एशिया को बचा लिया। अपने भाषण में केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि लाचित बरफुकन ने कैसे हमलावर मुगलों का विरोध करके देश तथा दक्षिण पश्चिम एशिया के हिस्से को अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने में मदद की। शाह ने यह भी बताया कि कैसे लाचित ने पूरे दक्षिण पश्चिम एशिया में सनातन धर्म को फैलाने में मदद की। केंद्रीय गृहमंत्री ने इस कार्यक्रम के माध्यम से लाचित की वीर गाथा को पूरे देश के सामने प्रस्तुत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की सराहना की और कहा कि उनका यह कार्य देश और सभ्यता के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि लाचित बरफुकन ने चार सदियों पहले छोटे-छोटे जातीय समूहों की मदद लेकर और उन्हें एकजुट करके अखंड भारत के निर्माण की पहल की थी। शाह के अनुसार स्वराज का विचार लाचित बरफुकन की रचनाओं में भी प्रतिबिम्बित होता है वह लाचित की जीत को स्वराज की जीत बताते हैं। साहस की व्याख्या करनी हो तो लाचित बरफुकन की जीवन गाथा ही काफी है। उन्होंने कहा कि लाचित के शरीर और मन में महाभारत में वर्णित वीरता के सभी सात गुण विद्यमान थे। गृह मंत्री ने अपने भाषण में सरायघाट की लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि सरायघाट की लड़ाई को सभी ने हमेशा याद रखा है और आने वाली पीढ़ियां भी इसे हमेशा याद रखेंगी। इसी तरह गृह मंत्री ने लाचित के कथन मोमाई देश से बड़ा नहीं का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि देशभक्ति का इससे अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है? गृह मंत्री ने वीर लाचित बरफुकन पर इतिहासकार सूर्य कुमार भुइयां के काम को भी याद किया और उनकी पुस्तक को विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह के दौरान अमित शाह ने असम सरकार द्वारा तैयार लाचित पर एक वृत्तचित्र का भी विमोचन किया। इस कार्यक्रम में 45 मिनट की उक्त डॉक्यूमेंट्री का 15 मिनट का सारांश भी दिखाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने विज्ञान भवन के अंदर आहोम साम्राज्य के इतिहास को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी और संग्रहालय का भी उल्लेख किया और सभी से प्रदर्शनी देखने का आग्रह किया। समारोह में अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा, केंद्रीय जहाजरानी, बंदरगाह और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश व वर्तमान सांसद रंजन गोगोई, केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली, सांसद तपन गोगोई, राज्य मंत्री पीयूष हजारिका व मुख्य सचिव पवन कुमार बरठाकुर भी उपस्थित थे।
लाचित नहीं होते तो भारत का नहीं होता पूर्वोत्तर