श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदश): भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के भरोसेमंद पीएसएलवी ने शनिवार को एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ओशनसैट) और आठ अन्य उपग्रहों को कई कक्षाओं में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। संस्थान ने मिशन को 'अद्वितीय' करार दिया। इसरो ने कहा कि पीएसएलवी-सी54 ने शनिवार को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ओशनसैट) और आठ अन्य उपग्रहों को सफलतापूर्वक ध्रुवीय कक्षाओं (सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट) में पहुंचा दिया। इसरो ने एक ट्वीट में कहा कि पीएसएलवी-सी54/ईओएस-06 मिशन पूरा हुआ। शेष उपग्रहों को भी उनकी लक्षित कक्षाओं में पहुंचा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को इस उपलब्धि पर इसरो और 'न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड' को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि पीएसएलवी-सी54 मिशन की सफलता पर इसरो और एनएसआईएल को बधाई। ईओएस-06 उपग्रह हमारे समुद्री संसाधनों के इष्टतम उपयोग में मदद करेगा यह पीएसएलवी की 56वीं उड़ान थी। इसरो का 2022 में यह पांचवां और अंतिम अभियान बताया जा रहा है। इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने मिशन को 'अद्वितीय' बताते हुए कहा कि पहली बार वैज्ञानिकों ने कक्षाओं को बदलने के लिए पीएसएलवी रॉकेट में दो कक्षा परिवर्तन प्रक्षेपक (ओसीटी) का इस्तेमाल किया है। उन्होंने यहां संवाददाताओं को बताया कि मैं शेष आठ उपग्रहों के अपेक्षित नई कक्षा में पहुंचने की खुशखबरी साझा करना चाहता हूं, जो कि ईओएस-06 उपग्रह की मूल कक्षा से नीचे है। यह वलयाकार ध्रुवीय कक्षा में 732 किलोमीटर से लेकर 513 किलोमीटर के बीच है। उन्होंने कहा कि पीएसएलवी-सी54 ने अपने चौथे चरण में पहली बार दो 'बर्न सीक्वेंस' (अंतरिक्ष यान की कक्षा को बदलने के लिए प्रणोदन प्रणाली का उपयोग) का उपयोग करके यह कक्षीय परिवर्तन किया है। आठ उपग्रहों के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि इनमें भारत-भूटान उपग्रह अलग होने वाला आखिरी उपग्रह था। उन्होंने कहा कि इससे पहले, हमारे पास स्पेसफ्लाइट यूएसए से एस्ट्रोकास्ट 1-4, और ध्रुवस्पेस से थायबोल्ट 1 और 2 और पिक्सल इंडिया लिमिटेड से 'आनंद' उपग्रह थे। इसलिए, सभी उपग्रह टीमों को उनके उपग्रहों को सही कक्षा में पहुंचने के लिए बधाई। उन्हें शुभकामनाएं।
भारत-भूटान उपग्रह का जिक्र करते हुए सोमनाथ ने कहा कि यह भारतीय और भूटान के वैज्ञानिकों के संयुक्त सहयोग के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और भूटान को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का दोहन करना चाहिए और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में इसका उपयोग करना चाहिए। मिशन कंट्रोल सेंटर में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को एक टेलीविजन संबोधन के जरिये जयशंकर ने कहा कि भारत और भूटान के बीच साझेदारी 21वीं सदी में एक नये युग में प्रवेश कर गई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आईएनएस-2बी को संयुक्त रूप से विकसित किया है। अंतरिक्ष यान निदेशक थेनमोझी सेल्वी ने कहा कि ईओएस-06 सौर पैनल युक्त है और यह सामान्य काम कर रहा है। ईओएस-6 ओशनसैट श्रृंखला में तीसरी पीढ़ी का उपग्रह है। इसका उद्देश्य उन्नत पेलोड विनिर्देशों के साथ-साथ अनुप्रयोग क्षेत्रों के साथ ओशनसैट -2 अंतरिक्ष यान की सेवाओं को निरंतर रखना है। चेन्नई से करीब 115 किलोमीटर दूर यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले 'लॉन्च पैड' से 44.4 मीटर लंबा रॉकेट 25.30 घंटे की उलटी गिनती के बाद पूर्वाह्न 11 बजकर 56 मिनट के पूर्व निर्धारित समय पर अपने अभियान पर रवाना हुआ। पीएसएलवी-सी54 के प्रक्षेपण के 17 मिनट बाद लक्षित कक्षा में पहुंचने पर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह या ओशनसैट सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग हो गया और उसे करीब 742 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित कर दिया गया।