रामपुर : रामपुर और आजम खान बीते तीन दशकों से एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे, लेकिन गुरुवार का विधानसभा उपचुनाव का जो नतीजा आया, उसने नई कहानी की शुरुआत कर दी है। 1980 के बाद से 10 बार रामपुर विधानसभा से चुने गए आजम खान को विधायकी से अयोग्य ठहराए जाने के बाद यहां चुनाव हुआ था। आजम खान के चुनाव लड़ने पर रोक थी तो उन्होंने अपने करीबी आसिम रजा को ही उतार दिया। आसिम रजा भले ही उम्मीदवार के तौर पर सामने थे, लेकिन प्रतिष्ठा आजम खान की दांव पर थी, जो जिले में सपा के सर्वमान्य नेता रहे हैं। लेकिन अब जब आसिम रजा हारे हैं तो उनसे ज्यादा यह आजम खान की भी हार है, जो गली-गली और नुक्कड़-नुक्कड़ में उनके लिए प्रचार कर रहे थे। इस सीट पर आकाश सक्सेना ने जीत हासिल की है, जो लंबे समय से आजम खान के खिलाफ कानूनी जंग भी छेड़े हुए थे। आसिम रजा की इस हार के साथ ही रामपुर के इतिहास में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है। आकाश सक्सेना भले ही रामपुर से बाहर एक नए नाम समझे जाते हों, लेकिन जिले की राजनीति में वह चिर-परिचित हैं।