इटानगर : अरुणाचल प्रदेश में केंद्र सरकार फ्रंटियर हाईवे बनाएगी। ये अगले पांच साल में तैयार होगा। तिब्बत-चीन-म्यामां से सटी भारतीय सीमा के काफी करीब इस हाईवे के निर्माण से सेना के मूवमेंट में आसानी होगी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार के अफसरों के हवाले से बताया जा रहा है कि  इसकी लंबाई 1748 किमी. होगी। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री इसे बनाएगी और इसका फोकस बॉर्डर एरिया से लोगों का पलायन रोकना है। ये हाईवे बोमडिला से शुरू होगा। जो नाफ्रा, हुरी और मोनीगांग पास से गुजरेगा। ये 3  प्वाइंट इंडिया-तिब्बत बॉर्डर के काफी करीब हैं। चीन सीमा के करीब जिडो और चेनम्ेंटी स्थित प्वाइंट से भी जाएगा। यह इंडिया-म्यामां बॉर्डर के पास विजयनगर में खत्म होगा। इस पूरे हाईवे को 9 पैकेज में बांटा जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की कीमत 27 हजार करोड़ होगी। सरकार इसकी लागत को कम करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। एक सरकारी अफसर ने बताया कि पूरे हाईवे में 800 किमी. सड़क हरियाली वाली जगहों पर बनेगी, क्योंकि इन इलाकों में अभी कोई सड़क मौजूद नहीं है। इस पर पुल और सुरंगें भी होंगी। 2024-25 तक इस प्रोजेक्ट का पूरा प्लान तैयार हो जाएगा और अगले 2 साल में इसका निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि 2026-27 तक ये काम हो जाएगा। इस हाईवे के चलते डेवलपमेंट में बूस्ट आएगा। खासतौर से उन इलाकों में जो सीमा के करीब हैं। इससे हमें वहां हो रहे पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी। मालूम हो कि रूस और कनाडा के बाद चीन सबसे बड़ा देश है। इसका कुल एरिया 97 लाख 6 हजार 961 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से 43 प्रति. जमीन दूसरों से हड़पी हुई है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर अपना दावा करता रहा है। पिछले साल ही अरुणाचल के 15 इलाकों के नाम बदले थे। यानी चीन के जमीन हथियाने की नीति का अगला फोकस भारत है।