नई दिल्ली : चीन सहित दुनिया के कई देशों में इन दिनों कोरोना का गंभीर असर देखा जा रहा है। संक्रमण की स्थिति के लिए विशेषज्ञ मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के ख्स्न.7 वैरिएंट को प्रमुख कारण मान रहे हैं, जिसकी गंभीरता को कम है पर संक्रामकता के लिहाज से यह चिंता बढ़ाने वाला है। भारत में कोरोना की स्थिति की बात करें तो यहां हालात काफी नियंत्रित लग रहे हैं, दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा फिलहाल काफी नियंत्रित है। पिछले 24 घंटे में 243 लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। वैश्विक खतरे को ध्यान में रखते हुए लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील की जा रही है। इस बीच हालिया रिपोर्ट्स  के मुताबिक विशेषज्ञों ने अगले डेढ़ महीने तक लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। सरकारी अधिकारियों ने लोगों को आगाह किया है कि अगले 40 दिनों में देश में कोरोना के मामलों में उछाल देखे जा सकते हैं। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते रहना और टीकाकरण को बढ़ाना बहुत आवश्यक है। एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए मीडिया से कहा, पिछले तीन साल के जैसे अनुभव रहे हैं उसका आकलन करें तो माना जा सकता है कि अगले डेढ़ महीने हमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अतीत में वैश्विक स्तर पर जब भी कोरोना के मामले बढ़े हैं उसके एक से डेढ़ माह के बाद भारत में भी इसका असर देखा गया है। इस आधार पर हमें आशंका है कि जनवरी में देश में संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। हालांकि इसकी गंभीरता कम रहने के अनुमान है, इस खतरे को ध्यान में रखते हुए हमें अभी से अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है। साल 2019 के आखिर में पहली बार कोरोना की शुरुआत से लेकर अब तक के पैटर्न को देखें तो स्पष्ट होता है कि सर्दियों के मौसम में संक्रमण बढ़ा है। डेल्टा वैरिएंट के कारण देश में आई दूसरी लहर फरवरी से शुरू होकर मार्च-अप्रैल 2021 में आई। इसके बाद साल 2022 में संक्रमण की तीसरी लहर देखी गई, जिसका असर जनवरी-फरवरी में अधिक रहा। अध्ययनों में भी इस बात की पुष्टि होती है कि तापमान गिरने की स्थिति वायरस को बढ़ने में मदद करती है। मौसम आधारित कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डेविड रेलमैन कहते हैं, सर्दी के मौसम में कोरोना के अधिक संक्रामक होने के मामले देखे गए हैं। इन्फ्लूएंजा जैसे श्वसन संक्रमण का कारण बनने वाले वैरिएंट्स की संक्रामकता प्रकृति सर्दियों के मौसम में बदल जाती है। प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2  वायरस भी ठंड और शुष्क परिस्थितियों में अधिक संक्रामकता का कारण बन सकता है।