बीजिंग : चीन के बदतर हालात देखते हुए दुनियाभर के वैज्ञानिक वहां हो रहे कोरोना विस्फोट की वजह जानने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि चीन सरकार से भरोसेमंद आंकड़े न मिलने के कारण यह सिर्फ अनुमान लगाने का एक खेल बन गया है। हॉन्गकॉन्ग के रिसर्चर्स चीन के ट्रेन यात्रियों का डेटा खंगाल रहे हैं। अमेरिका के सिएटल शहर के वैज्ञानिक चीन सरकार की लीक रिपोर्ट से केसेज का अंदाजा लगा रहे हैं। ब्रिटेन में चीनी वैक्सीन के कारगर होने पर स्टडी की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटोज और वीडियोज पर रिसर्च मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। इन सभी चीजों के तीन मकसद हैं। पहला- चीन में वायरस इतनी तेजी से कैसे फैला, दूसरा- असलियत में कितने लोगों की मौत हो रही है और तीसरा- क्या चीन में कोई नया और खतरनाक वैरिएंट मौजूद है। फिलहाल चीन में बिगड़े हालात को देखते हुए कई देशों ने कोरोना प्रोटोकॉल  की लिस्ट जारी कर दी है। अब अमरीका, ताइवान, जापान, भारत, इटली, साउथ कोरिया, पाकिस्तान और मलेशिया में चीन से आने वाले लोगों को नेगेटिव कोरोना टेस्ट रिपोर्ट दिखानी होगी। कुछ देशों में और वैक्सीनेशन स्टेटस भी बताना होगा। इस महीने हॉन्गकॉन्ग के रिसर्चर्स ने एक स्टडी में बताया कि जीरो-कोविड पॉलिसी खत्म होने के बाद कुछ महीनों में 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। एक अमेरिकी रिसर्च में कहा गया कि अप्रैल 2023 तक 5 लाख लोगों की मौत हो सकती हैं। लंदन के रिसर्चर्स ने बताया कि चीन में कोविड के चलते अप्रैल तक 17 लाख लोगों की मौत की आशंका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कड़े प्रतिबंधों के चलते चीन के नागरिकों में कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी मजबूत नहीं हो सकी। इसकी वजह से वहां कोरोना संक्रमण से ज्यादा मौतें होने की आशंका है। वैक्सीनेशन में कमी और टीकों का ज्यादा असरदार न होना भी मौत की प्रमुख वजहें हैं। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने हाल ही में डेली कोरोना केस रिपोर्ट जारी करना बंद कर दिया है। हालांकि, इसके पहले प्रकाशित होने वाले आंकड़े हमेशा कम ही होते थे।