नई दिल्ली : उत्तराखंड के जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। भू-धंसाव ने क्षेत्र के सभी वार्डों को चपेट में ले लिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ लगातार मामले की निगरानी कर रहा है। अब तक 70 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है। तेजी से हो रहे भू-धंसाव का दायरा भारत-तिब्बत सीमा को ओर बढ़ने लगा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-धंसाव की घटना पर जल्द ही प्रभावी रोक नहीं लगी तो ये देश की सुरक्षा को भी खतरा पैदा कर सकता है। ‘गेटवे ऑफ हिमालय’ के नाम से मशहूर जोशीमठ, जिसे ज्योतिर्मठ के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के चमोली जिले में एक शहर और एक नगरपालिका बोर्ड है। यह 6150 फीट (1875 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है, जो बद्रीनाथ जैस तीर्थ केंद्रों का प्रवेश द्वार भी है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों में से एक है। धार्मिक, पौराणिक और एतिहासिक शहर होने के साथ ही यह इलाका सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यहां से भारत-तिब्बत सीमा महज 100 किलोमीटर दूर है। हेमकुंड साहिब, औली, फूलों की घाटी आदि स्थानों पर जाने के लिए यात्रियों को इसी जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है। भू-धंसाव की ये घटनाएं अचानक नहीं हो रही हैं। जोशीमठ लंबे अरसे से धंस रहा है। इस भू-धंसाव को लेकर स्थानीय लोगों की जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 2006 में वरिष्ठ भूस्खलन वैज्ञानिक डॉक्टर स्पप्नामिता चौधरी ने जोशीमठ का अध्ययन किया था। उन्होंने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी थी। रिपोर्ट का क्या हुआ, इस संबंध में उन्हें भी जानकारी नहीं है। सोमवार रात कई मकानों में जब अचानक बड़ी दरारें आ गईं, तो पूरे नगर में भय फैल गया। ये दरारें हर दिन बढ़ रही हैं। मारवाड़ी वार्ड में स्थित जेपी कंपनी की आवासी कॉलोनी के कई मकानों में दरारें आ गईं। कॉलोनी के पीछे पहाड़ी से रात को ही अचानक मटमैले पानी का रिसाव भी शुरू हो गया। दरार आने से कॉलोनी का एक पुश्ता भी ढह गया। साथ ही बद्रीनाथ हाईवे पर भी मोटी दरारें आईं। वहीं तहसील के आवासीय भवनों में भी हल्की दरारें दिखीं। भू-धंसाव से ज्योतेश्वर मंदिर और मंदिर परिसर में दरारें आ गई हैं। सिंहधार वार्ड में बहुमंजिला होटल माउंट व्यू और मलारी इन जमीन धंसने से तिरछे हो गए। जोशीमठ में भू-धंसाव का कारण बेतरतीब निर्माण, पानी का रिसाव, ऊपरी मिट्टी का कटाव और मानव जनित कारणों से जल धाराओं के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट को बताया गया। जोशीमठ से भारत-तिब्बत सीमा महज 100 किलोमीटर दूर है। भू-धंसाव का क्षेत्र सैन्य क्षेत्र और आईटीबीपी के मुख्यालय की ओर बढ़ना शुरू हो गया है। सैन्य क्षेत्र में जाने वाली सड़क भी धंसनी शुरू हो गई है। जोशीमठ में भारतीय सेना का ब्रिगेड मुख्यालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की एक बटालियन तैनात है। जोशीमठ भारत-तिब्बत सीमा (चीन के अधिकार क्षेत्र) का अंतिम शहर है। यहां से नीती और माणा घाटियां भारत-तिब्बत सीमा से जुड़ती हैं। भू-धंसाव का क्षेत्र बढ़ता रहा तो यहां जवानों का रहना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में देश की सुरक्षा को भई खतरा पैदा हो सकता है।
जोशीमठ : धंस रहे घर-सड़क, देश की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी