पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता
गुवाहाटी : राज्य में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण से पहले उनको अन्य जिलों में विलय किए गए चार जिलों की खोई हुई मान्यता को पुनः प्राप्त करने में अनिश्चितता है क्योंकि आगामी पहली जुलाई से जिला गठन पर रोक लग जाएगी। देश के रजिस्ट्रार जनरल ने संकेत दिया है कि इस साल 30 जून के बाद जनगणना शुरू होगी। लगभग दो वर्षों तक चलने वाली जनगणना की अधिसूचना जारी होने के साथ ही देश में जिला गठन और प्रशासनिक परिवर्तन स्वाभाविक रूप से प्रतिबंधित हो जाएंगे। असम में वर्तमान में लागू निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण अधिसूचना के साथ प्रशासनिक परिवर्तन स्वाभाविक रूप से प्रतिबंधित है। वर्तमान में निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के कारण असम में प्रशासनिक फेरबदल निलंबित है। हालांकि जनगणना का काम शुरू होने पर प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया लंबे समय तक निलंबित रहेगी। इसलिए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने हाल ही में विलय किए गए चार जिलों को फिर से मान्यता देने का वादा किया है, लेकिन यह तय है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले असम और देश में कोई नया जिला नहीं बनाया जाएगा। जनगणना के दौरान प्रशासनिक बदलाव में कानूनी अड़चनें आएंगी। देश को 2011 की जनगणना के बाद 2021 में जनगणना करने के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि, देश के रजिस्ट्रार जनरल ने कोविड-19 स्थिति के कारण पंजीकरण को 31 दिसंबर 2022 तक के लिए स्थगित कर दिया था। हालांकि, अब समय सीमा बढ़ाकर 30 जून कर दी गई है। रजिस्ट्रार जनरल ने इस संबंध में प्रत्येक राज्य को पत्र भेजे हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि कोई भी राज्य जनगणना शुरू होने से तीन महीने पहले तक अपनी प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव नहीं कर सकता है। रजिस्ट्रार जनरल का पत्र यह स्पष्ट करता है कि असम और पूरे देश में इस साल अक्तूबर से जनगणना शुरू होगी। प्रशासनिक सीमा परिवर्तन पर प्रतिबंध लगाने के बाद राज्यों को जुलाई, अगस्त और सितंबर के तीन महीनों के दौरान महापंजीयक के साथ जानकारी साझा करके जनगणना की तैयारी करनी होगी। विभागीय निर्देश के अनुसार 11 माह में जनगणना की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। लेकिन हकीकत में पूरी प्रक्रिया पूरी होने में करीब दो साल का समय लग जाता है। नतीजतन, 2024 की शुरुआत में देश भर में आम चुनाव होंगे, लेकिन इससे पहले जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा द्वारा निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन के बहाने असम के चार जिलों बजाली, होजाई, तामुलपुर और विश्वनाथ का विलय करने के बाद उनका सीएम के वादे के बावजूद उन जिलों के लोगों को लोकसभा चुनाव से पहले अपने जिले वापस नहीं मिलेंगे। इन चार जिलों को ही नहीं राज्य के उन 110 गांवों के लोगों को भी जहां जिले बदले हैं, आम चुनाव से पहले खोई हुई मान्यता वापस नहीं मिलेगी। रजिस्ट्रार जनरल के पत्र ने प्रशासनिक समायोजन को पूरा करने के लिए 30 जून की समय सीमा तय की और आरजीआई को जनगणना से पहले अधिसूचित जिलों, गांवों, नगांव और अन्य प्रशासनिक इकाइयों जैसे तहसील, तालुक और पुलिस स्टेशनों की संख्या में बदलाव की जानकारी देने के लिए भी कहा। गौरतलब है कि जनगणना से पहले घरों की गिनती कराई जाएगी, जहां राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर की कवायद कराई जाएगी।