देहरादून : उत्तराखंड के जोशीमठ को भूस्खलन और धंसाव क्षेत्र घोषित किया गया है तथा दरकते शहर के क्षतिग्रस्त घरों में रह रहे 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। गढ़वाल के आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने हिमालयी शहर में चार-पांच स्थानों पर राहत केंद्र स्थापित किए हैं तथा कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है। इस बीच, चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में घर-घर गए और दरार वाले मकानों में रह रहे लोगों से राहत केंद्रों में जाने की अपील की। कुमार ने बताया कि जोशीमठ को भूस्खलन-धंसाव क्षेत्र घोषित किया गया है और प्रभावित  के प्रोफेसर डॉ. बहादुर सिंह कोटलिया  का कहना है कि जोशीमठ भू-धंसाव जैसे स्थिति उत्तरकाशी, नैनीताल, और चंपावत में भी देखने को मिल सकती है, क्योंकि हिमालय में निरंतर भूगर्भीय हलचल हो रही है। आबादी का बढ़ता दबाव और निर्माण से पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। इन शहरों की नींव मजबूत नहीं होने की वजह से भूस्खलन और भूं-धंसाव के लिहाज से अति संवेदनशील है।