गुवाहाटी : शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के उद्देश्य से केएलओ प्रमुख जीवन सिंह सहित अन्य नौ सदस्यों को बुधवार को दिल्ली ले जाया गया। जीवन सिंह के साथ विदेश सचिव जॉन कोच, उप सेना प्रमुख परवेल कोच, सूर्य कोच और सांस्कृतिक सचिव विश्वजीत कोच भी दिल्ली पहुंचे हैं। बुधवार सुबह वे म्यामां सीमा से चराईदेव पहुंचे। उन्हें चराईदेव से नौ विशेष पुलिस वाहनों के काफिले में सोनारी लाया गया और वहां से गुवाहाटी ले जाया गया। 

शांति समझौते के लिए उन्हें गुवाहाटी से दिल्ली ले जाया गया। केएलओ प्रमुख जीवन सिंह दो दिन पहले म्यामां से मोन जिले की सीमा पर पहुंचे और असम राइफल कैंप नंबर 27 में रुके। उन्होंने फिर असम में प्रवेश किया और बुधवार को दिल्ली के लिए उड़ान भरी। गौरतलब है कि 2021 से केएलओ की केंद्र सरकार से गोपनीय बातचीत चल रही थी। कमतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (केएलओ) का गठन 1995 में बना था और यह तीन दशकों से कोच राजबंशी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है। 

केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में शांति वार्ता की पेशकश के बाद जीवन सिंह म्यामां कैंप छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए। ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में अलग राज्य कमतापुर के गठन और केएलओ के साथ केंद्र सरकार के शांति समझौते की खबरों पर व्यापक रूप से चर्चा हो रही थी। लेकिन कई लोगों के लिए यह विश्वसनीय नहीं थी। लेकिन कल जब यह खबर आई कि जीवन सिंह नौ अन्य साथियों के साथ शांति वार्ता के लिए घने जंगल से निकल आए हैं, तो हर स्तर पर खलबली मच गई। 

विभिन्न दल-संगठनों ने कमतापुर राज्य के गठन और कोच राजवंशी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाले जीवन सिंह का स्वागत किया । बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के विभिन्न हिस्सों से केएलओ के पूर्व नेताओं और सदस्यों ने बुधवार को शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत की। जीवन सिंह के शांति वार्ता के लिए निकलने की बात सुनकर उसके परिवार के बुजुर्ग मामा, भाई, बहनें व अन्य लोग भावुक हो गए और उसकी इस पहल की सराहना की। जीवन सिंह, जो तीन दशकों से कोच राजबंशी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में अपनी मातृभूमि लौट आए हैं। उल्लेखनीय है कि जीवन सिंह की पत्नी की कई साल पहले नेपाल में गंभीर बीमारी से मौत हो गई थी। उनकी दो बेटियां बंगाल में रिश्तेदारों के यहां रहकर पढ़ाई कर रही हैं।