पेड़ों को न करो नष्ट, वरना सांस लेने में होगा कष्ट। यह पहेली तो आपने सुनी होगी। लेकिन इस पहेली को साबित कर दिखाया है करौली के इन दो नन्हे-मुन्ने एलकेजी कक्षा में पढ़ने वाले भाई बहनों ने। जहां एक ओर लापरवाह लोग हरे वृक्षों की बिना सोचे समझे कटाई करते हैं। तो वहीं राजस्थान के करौली में दाखा देवी आदर्श विद्या मंदिर में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित शिशु मेले में एलकेजी कक्षा में पढ़ने वाले 5 वर्षीय गर्व चतुर्वेदी और उसकी 4 वर्षीय छोटी बहन भव्या चतुर्वेदी ने शिशु मेले में पेड़ों की नर्सरी लगाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनूठी मिसाल कायम की है।
जिसकी बाल मेले में आए कई लोगों ने जमकर तारीफ की। साथ ही इन दोनों भाई बहनों के इस नवाचार से कई लोगों ने प्रेरणा भी ली। सबसे खास बात यह है कि स्कूल में लगने वाले कई बाल मेलों में बच्चे चाट, पकौड़ी और खिलौनों की ही दुकान लगाते हैं। लेकिन इन दोनों नन्हे मुन्ने भाई बहनों के नवाचार से कई बच्चों ने प्रेरणा भी ली। बाल मेले में आए दर्जनों लोगों ने नन्हे मुन्ने भाई बहनों की प्राणवायु दुकान से पेड़ भी खरीदे।
प्राणवायु दुकान पर थे ये पेड़ : दाखा देवी आदर्श बालिका विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि आज हमारे विद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में शिशु बाल मेले का आयोजन किया गया है। जिसमें स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा कई प्रकार की दुकान लगाई गई है। लेकिन इसमें सबसे प्रेरणा की जो चीज है। वह है पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाई गई पेड़ों की एक नर्सरी। हमारे स्कूल में पढ़ने वाले 5 वर्षीय एक बालक गर्व चतुर्वेदी और उसकी 4 वर्षीय छोटी बहन भव्या चतुर्वेदी ने अपने पिता की प्रेरणा से नर्सरी लगाई है, जिसमें तुलसी, कालमेघ, कनेर, नींबू, गेंदा, मिर्ची सहित कई प्रकार के पौधे हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य का कहना है कि पौधे लगाने के पीछे हमारा सीधा-सीधा उद्देश्य होता है पर्यावरण संरक्षण। आज के इस युग में हम देखते हैं कि पर्यावरण सबसे ज्यादा प्रदूषित हो रहा है। जिसे बचाने के लिए पौधे सबसे उपयोगी चीज हैं। लेकिन आज लगने वाले इस मेले में एलकेजी कक्षा में पढ़ने वाले इन दोनों भाई बहनों की पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल है।