गुवाहाटी :  केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने एफसीआई, क्षेत्रीय कार्यालय गुवाहाटी में आयोजित एक समारोह से मणिपुर के तामेंगलोंग में भारतीय खाद्य निगम के डिपो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एफसीआई ने पूर्वोत्तर राज्यों में एक लंबा सफर तय किया है और इसकी भंडारण क्षमता 2014 में 5.05 लाख मीट्रिक टन था, जो 2023 में  बढ़कर 8.21 लाख  मैट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने आगे कहा कि एफसीआई ने संबंधित राज्य सरकारों के साथ सहयोग करके असम और त्रिपुरा राज्यों में खरीद क्षमता का पूंजीकरण किया है। असम और त्रिपुरा ने चल रहे केएमएस 2022-23 के दौरान अब तक क्रमशः 1,21,630 मैट्रिक टन और 28,476 मैट्रिक टन धान की खरीद की  गई है, जो सीजन बढ़ने के साथ और बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में खरीद का दोहरा उद्देश्य है, पहला खाद्यान्न की आवश्यकता में खुद को आत्मनिर्भर बनाना और दूसरा किसानों को प्रभावी मूल्य समर्थन प्रदान करना है। मीडिया को दिए एक बयान में वर्तमान सरकार की सराहना करते हुए केंद्रीयमंत्री ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार सभी क्षेत्रों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसके विकास को पहले ही तेज कर चुकी है। समारोह को संबोधित करते हुए एफसीआई के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अशोक केके मीणा, आईएएस ने राष्ट्र को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने तथा मूल्य स्थिरीकरण के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करने में एफसीआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नीति के अनुरूप एफसीआई ने खुले बाजार में गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने और प्रभावी मूल्य स्थिरीकरण प्राप्त करने के लिए ओपन मार्केट सेल्स स्कीम (घरेलू) शुरू की है। उन्होंने कहा कि उक्त योजना के तहत 30 लाख मैट्रिक टन गेहूं खुले बाजार में उतारा जाएगा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय राज्य में एफसीआई ने इस योजना के तहत 16400 मैट्रिक टन गेहूं के लिए निविदाएं जारी की ताकि आटा मिले,  निजी व्यापारी, थोक खरीदार और गेहूं उत्पादों के निर्माता एफसीआई के निर्दिष्ट डिपो से स्टॉक उठा सके।

इसके बाद और टेंडर होंगे। पूर्वोत्तर क्षेत्र को यह अवसर प्रदान करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कार्यकारी निदेशक (एनई) डीपी शुक्ला ने कहा कि ऐसी क्षमताओं के निर्माण के साथ, एफसीआई चार महीने से अधिक की आवश्यकता के लिए स्टॉक रख सकता है और कहा कि एफसीआई किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए इसे छह महीने की पीडीएस आवश्यकता तक बढ़ाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि एफसीआई भारत सरकार की केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएसएस) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में 1,05,890 मैट्रिक टन भंडारण स्थान बना रहा है। 2017 से अब तक 53,930 मैट्रिक टन की क्षमता का निर्माण किया गया है और पूर्वोत्तर में इस वर्ष के अंत तक लगभग 30,000 मैट्रिक टन की एक और क्षमता आ रही है। शुक्ला ने कहा कि तामेंगलोंग में 4730 मैट्रिक टन की यह नवनिर्मित भंडारण क्षमता तमेंगलोंग और नोनी राजस्व जिलों में खाद्यान्न की आवश्यकता को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि एफसीआई के बढ़े हुए स्टैकिंग मानदंडों के साथ यह गोदाम 5900 मैट्रिक टन तक खाद्यान्न का भंडारण कर सकता है। उद्घाटन समारोह का समापन ईडी (एनई) डीपी शुक्ला   की ओर से धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया गया।