डिजिटल डेस्क: लोकसभा व विधानसभा चुनाव दो सीटों लड़ने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर  सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई, और जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया हैं। कोर्ट का कहना हैं कि यह विधायी मामला है और सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह विधायी नीति का मसला है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह गलत है क्योंकि जिस सीट को छोड़ा जाता है, वहां पर दोबारा चुनाव होता है और वोटर को दोबारा आना पड़ता है, यह अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है,सीजेआई ने कहा चुनाव लड़ने वाला पहले से कहां जानता है कि दोनों सीटों पर जीत हासिल करेगा।वकील ने यह भी कहा कि विधि आयोग ने भी इस पर अपनी रिपोर्ट दी है,और सीजेआई ने कहा कि एक बार संसद ने दो सीटों पर चुनाव लड़ने पर सीमा तय कर दी थी,अगर उसे लगेगा तो कदम उठाएगा।

वकील का कहना हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया समेत अधिकर देशों में स्थापित लोकतंत्र में सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ने का प्रावधान है,याचिकाकर्ता की ओर से अनुच्छेद 32 के तहत जन प्रतिनिधित्व कानून-1951 की धारा 33(7) की संवैधानिकता को चुनौती दी।इसमें केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई हैं।

कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग, याचिकाकर्ता के पक्ष पर गौर करने के बाद यह निर्णय लिया है कि यह एक विधायी नीति का मुद्दा है और लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में संसद इस पर विकल्प दे सकता है। संसद ही इस पर कदम बढ़ा सकता है और यह अदालत ऐसे में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। याचिका का हम निपटारा करते हैं।