अगरतला : त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ राज्य चुनाव आयोग ने भी पूरी तैयारी कर ली है। लोग भयमुक्त होकर चुनाव में अपनी भागेदारी कर सकें, उसके लिए चुनाव आयोग ने कई रणनीति बनाई हैं। खास नंबर जारी किए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा को चुनाव तक सील कर दिया गया है। त्रिपुरा के साथ लगने वाले राज्यों की सीमाएं सील कर दी गई हैं। त्रिपुरा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी किरण गिट्टे ने ‘शून्य मतदान हिंसा मिशन’ को हासिल करने की रणनीति के तहत 60 विधानसभा क्षेत्रों में से प्रत्येक के लिए एक अलग लैंड लाइन फोन, मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर जारी कर दिया है।
साथ ही मतदान के दिन यदि किसी को मतदान प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या की स्थिति में मतदाताओं से इन नंबरों पर संपर्क करने का आग्रह किया। विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से हिंसा मुक्त चुनाव कराने की मांग है, ताकि लोग भयमुक्त होकर अपने मताधिकारों का प्रयोग कर सकें। गिट्टे ने कहा कि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान करें।किसी भी परेशानी होने पर दिए गए नंबरों पर जानकारी दें। हम जल्द से जल्द मौके पर पहुंचेंगे और कानून के मुताबिक स्थिति से निपटेंगे। उन्होंने बताया कि आयोग ने चौबीसों घंटे निगरानी के लिए, विशेष रूप से मतदान के दिन, एक सिविल सेवा अधिकारी के साथ-साथ प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए जमीनी स्तर के पुलिस अधिकारियों को नामित किया है।
जो कोई भी बूथ कैप्चरिंग, जबरदस्ती, डराना-धमकाना या किसी भी मतदाता को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डराने-धमकाने और उसे मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालने से रोकने का अपराध करता है, तो अपराधी के खिलाफ लोक अधिनियम, 1951 की धारा 35 ए (सी) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गिट्टे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधी को ना केवल तीन वर्ष तक की कारावास हो सकती है, बल्कि जुर्माना भी हो सकता है। यदि ऐसा अपराध सरकार की सेवा में किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो उसे कम से कम तीन साल, लेकिन इसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी अदा करना होगा।
उन्होंने कहा कि ईसीआई ने सभी चुनाव लड़ने वाले दलों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित किया है, और पुलिस गड़बड़ी फैलाने वालों एवं अपराधियों को उनकी पार्टी की संबद्धता पर विचार किए बिना गिरफ्तार कर रही है। इससे हिंसा की घटनाओं में काफी कमी आई है और चुनाव आयोग अगले दो दिनों तक इसे शून्य करने के लिए काम कर रहा है ताकि आदर्श स्थिति में मतदान हो सके। उन्होंने कहा कि कानून के अनिवार्य प्रावधान के तहत 72 घंटे का प्रोटोकॉल सोमवार से पूरे राज्य में शुरू हो गया, क्योंकि गुरुवार को चुनाव होना है।