दुनिया में पर्यावरण संकट एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। दरअसल यह एक ऐसा खतरा है जो मानव जाति के साथ साथ दुनिया के अन्य प्राणियों के जीवन पर भी संकट बन गया है। पहली बार यह पता चला है कि दुनिया में वनों के विकास और विस्तार में जंगली हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सेंट लुइस विश्वविद्यालय के शोध दल ने इस पर काम किया है और अपनी शोध रिपोर्ट से दुनिया को अवगत कराया है। दरअसल यह पाया गया है कि हाथियों का झूंड लगातार इधर उधर मंडराते हुए नए इलाकों में जंगल पैदा करने में सबसे प्रमुख भूमिका निभाता है। इसकी वजह से जैव विविधता का भी प्रसार होता है। नेशनल एकाडेमी ऑफ साइंस की पत्रिका में इस शोध के बारे में बताया गया है।
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि हाथियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और इस वजह से जंगल भी कम हो रहे हैं। यह स्थिति पूरी दुनिया को खतरे की तरफ धकेल रही है। शोध में खास तौर पर अफ्रीका के जंगल और वहां की जैव विविधता के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसमें बताया गया है कि जंगलों का भौगोलिक क्षेत्र बढ़ने से ही हवा में मौजूद कार्बन को सोखने की गति बनी रहती है। अगर अफ्रीका के मध्य और पश्चिमी इलाकों के घने जंगल समाप्त हो गए तो पूरी दुनिया का परिस्थितितंत्र ही बिगड़ जाएगा। वर्तमान में यहां के जंगल पूरी दुनिया के छह से नौ प्रतिशत तक कार्बन सोखते हैं। अभी वहां इन जंगलों को विस्तार देने वाले हाथियों का जीवन ही संकट में पड़ा हुआ है।
जंगल कम होने की वजह से दुनिया में गर्मी बढ़ी है, इस पर बहुत शोध पहले ही हो चुके हैं। उसके खतरा दुनिया देख रही है क्योंकि एक के बाद एक ग्लेशियर भी इसी गर्मी की वजह से पिघलते जा रहे हैं। इस शोध दल का नेतृत्व वहां के असिस्टेंट प्रोफसर स्टीफन ब्लैक ने किया है। हाथियों का झूंड कम कार्बन सोखने वाले पेड़ों को अपना भोजन बनाते हैं और उनमें मौजूद पौष्टिकता से वह अधिक कार्बन सोखने वाले पेड़ों को फायदा पहुंचाते हैं। इसके जंगल में एक संतुलन बना रहता है और जंगल के बढ़ने से कार्बन सोखने की गति भी बढ़ती जाती है। हाथियों के मल से भी अधिक कार्बन सोखने वाले पेड़ों को पौष्टिकता मिलती है। कभी अफ्रीका में एक करोड़ से अधिक हाथी रहा करते थे। अब उनकी संख्या पांच लाख से भी कम हो गई है।