गुवाहाटीः राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के नाम पर सालाना करोड़ों खर्च करने के बावजूद बाल और मातृ मृत्यु दर में उम्मीद के मुताबिक कमी नहीं आई है। हैरानी की बात है कि असम में पिछले 10 महीनों में 6,000 से अधिक नवजात शिशुओं और बच्चों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अधिकारियों के अनुसार इस साल मई 2022 से फरवरी 2023 तक असम में विभिन्न कारणों से 5,805 बच्चों की मौत हुई, हालांकि, 2021-22 के मई से फरवरी तक पिछले 10 महीनों के दौरान सबसे ज्यादा 6,721 बच्चों की मौत असम में दर्ज की गई थी। दो साल की अवधि में मृत्यु दर में 13.6 फीसदी की कमी आई है।
एनएसएम के अनुसार पिछले 10 महीनों में राज्य में 448 प्रसुतियों की मृत्यु हुई हैं। इन प्रसुतियों की मृत्यु मई 2022 से फरवरी, 2023 के बीच हुई। हालांकि, प्रसुति-मृत्यु दर में भी पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत की कमी आई है। इस बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम ने राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से शनिवार को गुवाहाटी के असम जल भवन में एक दिवसीय स्वास्थ्य मंथन-6 का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन,असम की निदेशक आईएएस अधिकारी डॉ. एम एस लक्ष्मी प्रिया की देखरेख में आयोजित कार्यशाला और समीक्षा में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय डॉ. नीलमाधव दास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के निदेशक कमलजीत तालुकदार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम के कार्यवाहक निदेशक डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने भाग लिया।
एक दिवसीय कार्यशाला में सभी जिलों के स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया और प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदर्शन की विस्तार से समीक्षा की गई। उन्होंने राज्य में प्रसुति एवं शिशु स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाए जाए, उस पर विस्तार से चर्चा की। वित्तीय वर्ष 2022-23 की सशर्त कार्रवाई रिपोर्ट की जिला स्तर पर समीक्षा की गई। इससे जिलों को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए कोई भी आवश्यक संशोधन और उपाय करने में सक्षम होने की उम्मीद है।