नई दिल्ली : देश में पिछले 10 दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है। करीब पांच महीनों के बाद एक बार फिर से दैनिक मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटे में देश में 1800 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते केस के लिए ओमिक्रॉन एक्सबीबी.1.16 सब-वैरिएंट को कारण माना जा रहा है। अध्ययनों में पाया गया है कि यह सब-वैरिएंट अत्यधिक संक्रामकता वाला है और इसकी इम्यून स्केप क्षमता आसानी से उन लोगों को भी संक्रमित कर सकती है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों का टीकाकरण हुआ है उनमें ये नए वैरिएंट्स गंभीर रोग का कारण बनते नहीं देखे जा रहे हैं, पर कोरोना वायरस में हुए म्यूटेशन इसे प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देकर ऐसे लोगों को भी संक्रमित करने में मदद कर रहे हैं। इसी माह की शुरुआत में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फाइजर के ओमिक्रॉन बूस्टर शॉट को मंजूरी दे दी है। जिन बच्चों को पहले से ही कंपनी के टीके की तीन खुराक मिल चुकी है, वह अब इसकी चौथी डोज भी ले सकते हैं। छह महीने से चार साल की उम्र के बच्चे, जिन्होंने दो महीने से अधिक समय पहले फाइजर और बायोएनटेक के मूल मोनोवालेंट शॉट्स के साथ अपनी तीन-खुराक श्रृंखला पूरी की थी, वे अब चौथे शॉट के पात्र हैं।

कोविड वैक्सीन की चौथी खुराक की प्रभाविकता को जानने के लिए कर्नाटक राज्य द्वारा संचालित श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च द्वारा एक अध्ययन किया गया। इसमें कोविशील्ड वैक्सीन की बूस्टर खुराक प्राप्त कर चुके 350 प्रतिभागियों की प्रतिरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि उन सभी में सुरक्षात्मकता पाई गई।  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर ने भी एक रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल देश में कोविड-19 की चौथी खुराक की आवश्यकता नहीं है। वह कहते हैं अगर किसी व्यक्ति ने कोविड-19 टीके की तीसरी खुराक ली है, तो इसका मतलब है कि उसमें टी-सेल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अधिक है जो कोरोना से सुरक्षा देने के लिए काफी है। नए वैरिएंट में बदलाव जरूर आए हैं पर यह मूल वायरस से इतना भी अलग या खतरनाक नहीं है कि हमें एक खास टीके की आवश्यकता हो। फिलहाल तीन टीके ही पर्याप्त हैं।