मैसुरु (कर्नाटक) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संघर्ष में विश्वास नहीं करता बल्कि इन दोनों के बीच सह-अस्तित्व को महत्व देता है। मोदी ने इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) की शुरुआत करते हुए कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा एक सार्वभौम मुद्दा है। आईबीसीए को ‘बिग कैट’ की प्रजातियों के संरक्षण एवं सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 साल पूरे होने के अवसर पर कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी शुरुआत की। भारत में 2022 में बाघों की संख्या 3,167 थी। इस आंकड़े का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि आज बाघों की जो संख्या है वह दिखाती है कि हमारे यहां इस परिवार के सदस्य बढ़ रहे हैं। यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से बाघों की संख्या में वृद्धि पर खुलकर प्रशंसा करने का आह्वान करते हुए कहा कि मुझे भरोसा है और मैं दुनिया को विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले दिनों में इस दिशा में और अधिक हासिल करेंगे।

आंकड़ों के अनुसार, देश में 2006 में बाघों की संख्या 1411, 2010 में 1706, 2014 में 2,226, 2018 में 2,967 और 2022 में 3,167 थी। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे एवं अन्य मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की सफलता न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत ने न सिर्फ बाघों को बचाया है, बल्कि उनकी आबादी बढ़ने के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी भी कायम की है। मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां प्रकृति की रक्षा करना इसकी संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के फलने फूलने के लिए पारिस्थितिकी का फलना फूलना महत्वपूर्ण है। भारत में यही हो रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव का संरक्षण सिर्फ एक देश का मुद्दा नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि चीते दशकों पहले भारत में विलुप्त हो गए थे।

प्रधानमंत्री ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाने की हालिया पहल का जिक्र करते हुए कहा कि यह विदेशों से चीतों का पहला सफल स्थानांतरण था। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में इन मादा चीतों ने चार शावकों को भी जन्म दिया है। जुलाई 2019 में प्रधानमंत्री ने ‘वैश्विक नेताओं के गठबंधन’ का आह्वान किया था और एशिया में अवैध शिकार एवं अवैध वन्यजीव व्यापार पर दृढ़ता से अंकुश लगाने की बात कही थी। अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री के इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए आईबीसीए की शुरुआत की जा रही है। आईबीसीए का उद्देश्य बाघ और शेर समेत दुनिया की ‘बिग कैट’ परिवार की सात प्रमुख प्रजातियों की रक्षा एवं संरक्षण करना है। आईबीसीए ‘बिग कैट्स’ प्रजाति के सात पशुओं - बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, पुमा, जगुआर और चीते के संरक्षण एवं सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा। सह्याद्री या पश्चिमी घाट में कई आदिवासी समुदाय हैं, जिन्होंने वन्यजीवों और बाघों के फलने-फूलने की दिशा में काम किया है। मोदी ने इन पशुओं के संरक्षण के प्रयासों में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑस्कर विजेता वृत्तचित्र ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ में प्रकृति और प्राणियों के बीच पारंपरिक बंधन को भी दर्शाया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि एक तरफ हमने आजादी के 75 वर्ष पूरे किए और आज भारत में दुनिया की 75 फीसदी बाघ आबादी है। यह भी संयोग है कि भारत में बाघ अभयारण्य 75,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। पिछले 10-12 वर्षों में बाघों की संख्या 75 फीसदी बढ़ी है। इससे पहले मोदी ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 साल पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रमों के तहत पश्चिमी घाट के रमणीय दृश्यों को देखा और कर्नाटक के बांदीपुर बाघ अभयारण्य में सफारी की। प्राप्त सूचना के अनुसार, ‘सफारी’ के अनुकूल कपड़े और टोपी पहने प्रधानमंत्री ने बाघ अभयारण्य के अंदर एक खुली जीप में लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय की, जो आंशिक रूप से चामराजनगर जिले के गुंडलुपेट तालुका में और आंशिक रूप से मैसूरु जिले के एच. डी. कोटे और नंजनगुड तालुका में स्थित है। मोदी ने सफारी की कुछ तस्वीरों के साथ ट्वीट किया कि सुंदर बांदीपुर बाघ अभयारण्य में सुबह का समय बिताया और भारत के वन्य जीवन, प्राकृतिक सुंदरता और विविधता की झलक देखी।