डिजिटल डेस्क: चीन से तनाव के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पूर्वी सीमाओं की समीक्षा की और  पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बीच सीडीएस ने सिक्किम सेक्टर में एलएसी की सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। आगे  उन्होंने पश्चिम बंगाल के सुकना में त्रिशक्ति कोर के मुख्यालय का भी दौरा किया, जहां वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने उन्हें भारतीय सेना की तैयारियों के बारे में जानकारी दी।चीन की अक्रामकता को देखते हुए भारत ने सीमाई क्षेत्रों में रणनीतिक तौर पर कई कदम उठाए हैं और सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी इसी रणनीति का हिस्सा है तथा सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी भी बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी हालात से निपटने के लिए सेना को तुरंत मोबिलाइज किया जा सके।

सीडीएस शनिवार और रविवार को उत्तरी बंगाल और हसीमरा एयरबेस पहुंचे थे, और  नए राफेल फाइटर जेट्स की यहां तैनाती है, और यहां सुकना में 33 त्रिशक्ति कॉर्प्स का हेडक्वार्टर भी है।सीडीएस अनिल चौहान ने सिक्किम में पूर्वी सीमाओं पर हालात के बारे में भी जानकारी ली, तथा उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स डेवलपमेंट का जायजा लिया।

सीडीएस ने जवानों से की बातचीत:

सीडीएस ने दूर-दराज के इलाकों में तैनात जवानों से भी बातचीत की और उनके ऊंचे मनोबल और पेशेवर अंदाज की सराहना की और रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सीडीएस ने फॉर्मेशन को ट्रेनिंग बढ़ाने की सलाह दी। 

चीन भारत के खिलाफ हो रहा अक्रामक:

चीन के साथ लगने वाले 3,488 किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर सैन्य डिस-इंगेजमेंट पूरी नहीं हुई है और  भारत को टार्गेट करते हुए चीन एलएसी के आसमपास सेना की तैनाती, बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर और एयर बेस स्थापित कर रहा है। पिछले हफ्ते 2 अप्रैल को चीन ने एक बार फिर अक्रामकता दिखाई, और अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के नाम बदल दिया और भारत ने हालांकि, चीन की एकतरफा कार्रवाई को खारिज किया है।

सीमाई इलाकों में विकास कर रहा है:

चीन अपने पांव भूटान तक पसारने की कोशिश में है अब ऐसे में मसलन, सिक्किम-भूटान-तिब्बत जंक्शन में डोकलाम से लगने वाले भूटान सीमाओं में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम कर रहा है तथा अप्रैल-मई 2020 में भारत-चीन सेनाएं के बीट खूनी झड़प के बाद भारत ने सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी को और बढ़ा रहा है।