डिजिटल डेस्क: समाजवादी पार्टी के नेता यूसुफ मलिक के खिलाफ राजस्व की वसूली और अपर नगर आयुक्त को धमकी देने के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम  लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी को फटकार लगाई है और सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि इस तरह से एनएसए लगाना दुरुपयोग के समान है और साथ ही कोर्ट ने कहा कि एनएसए को राजनीतिक प्रकृति के मामलों में लागू नहीं किया जाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि हम काफी हैरान हैं कि संपत्ति के लिए राजस्व की वसूली के मामलों में एनएसए लगाया जा रहा है, तथा  जस्टिस संजय किशन कौल और एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि यूसुफ मलिक के खिलाफ की गई एनएसए की कार्रवाई को हम रद्द करते हैं और उसे तत्काल मुक्त करते हैं।

2022 अप्रैल में हुई थी गिरफ्तारी:

यूसुफ मलिक को पिछले साल अप्रैल में एनएसए की धारा 3 (2) के तहत यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया था और उनके खिलाफ सरकारी अधिकारियों को धमकाने और उनके रिश्तेदारों की संपत्ति से राजस्व की वसूली सहित उनके काम को रोकने के लिए दो प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार:

वहीं मलिक ने पहली बार जुलाई में अपनी नजरबंदी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी याचिका पर निर्णय लेने में हाई कोर्ट की ओर से देरी के कारण वह सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मजबूर होना पड़ा और मलिक के वकील वसीम कादरी ने तर्क दिया कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया था और राज्य में वर्तमान सत्तारूढ़ दल के हाथों पुलिस द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया गया था।

मलिक को तत्काल रिहा करने का आदेश:

सुप्रीम कोर्ट से आदेश पारित नहीं करने की अपील करते हुए, राज्य की तरफ से बताया गया कि यूसुफ मलिक के नजरबंदी का एक वर्ष 23 अप्रैल को पूरा हो जाएगा और उन्हें उस अवधि से अधिक हिरासत में नहीं लिया जा सकता है और वह 12 दिनों के बाद बाहर आ जाएंगे तथा सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य के फैसले को अस्वीकार कर दिया और कहा कि यह कानून का दुरुपयोग है। पीठ ने सोमवार को सरकार से कहा था कि या तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए या अदालत के आदेश के लिए तैयार रहें।