लखनऊ : 'मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम...। ये आखिरी शब्द माफिया अतीक के भाई अशरफ के हैं। शनिवार रात को प्रयागराज के काल्विन हॉस्पिटल के बाहर जैसे ही अशरफ ने ये शब्द बोले गोलियों की तड़तड़ाहट होती है। अतीक और अशरफ मारे जाते हैं।  अशरफ ने गोली लगने से पहले जिस गुड्डू मुस्लिम का नाम लिया वो आखिर है कौन? उमेश पाल हत्याकांड से इसका क्या कनेक्शन है? गुड्डू मुस्लिम का जन्म प्रयागराज में हुआ। चार भाइयों में सबसे बड़ा गुड्डू शुरुआत में घर की चिकन शॉप पर भी बैठता था। हालांकि 15 साल की उम्र में ही उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। इसके बाद उसका खौफ कायम हो गया।

स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले जब वह सड़क पर चलता था तो कोई भी उसकी आंखों में देखने की हिम्मत नहीं करता था। स्थानीय लोग बताते हैं कि उसका स्वभाव बॉलीवुड फिल्मों के उन गैंगस्टर्स जैसा है जो काफी गुस्सैल और अनप्रिडिक्टेबल होते हैं यानी कभी भी कुछ कर बैठने वाला शख्स। इसलिए जब वह सड़क से गुजरता था तो लोग शांत खड़े हो जाते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गुड्डूू डकैती और जबरन वसूली समेत कई अपराधों में शामिल रहा है। हालांकि बम बनाने में एक्सपर्टीज हासिल करने की वजह से गैंगस्टरों के बीच उसकी काफी मांग थी। इसी वजह से लोग उसे गुड्डू बमबाज भी कहते हैं। जब गुड्डïू अपराध के रास्ते पर चलने लगा तो घरवालों ने उसे लखनऊ भेज दिया। लखनऊ में सुधरने की बजाय वह बड़े माफियाओं से जुड़ता गया। गुड्डू मुस्लिम लखनऊ में रहने के दौरान फैजाबाद के हिस्ट्रीशीटर सत्येंद्र सिंह की गैंग से जुड़ गया।

1997 में श्रीप्रकाश शुक्ला ने सत्येंद्र सिंह की एके-47 से हत्या कर दी थी। साल 1997 में ही लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज के फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर फ्रेडरिक गोम्स की हत्या हॉस्टल में घुसकर कर की गई। इसमें गुड्डूू मुस्लिम का नाम सामने आया। पुलिस ने इस मामले में गुड्डू के साथ धनंजय सिंह को भी गिरफ्तार किया। हालांकि कुछ दिनों बाद सबूतों के अभाव में जमानत पर उसे रिहा कर दिया गया। इसके बाद गुड्डू धनंजय सिंह के काफी करीब आ गया। उस वक्त लखनऊ में एमएलसी अजीत सिंह बाहुबली के तौर पर उभरे थे। रेलवे ठेके में उनका वर्चस्व था। अजीत सिंह का मुकाबला करने के लिए बाहुबली धनंजय ने गुड्डू मुस्लिम को सामने किया। गुड्डूू भी उस वक्त अपराध की दुनिया में बड़ा नाम कमा चुका था। गुड्डूू अब उन रेलवे अफसरों का ही अपहरण करने लगा, जो अजीत सिंह के करीबी थे। साथ ही हत्या की धमकी देकर रेलवे के टेंडर खुद लेने लगा। अब तो गुड्डू के कहने पर ही सरकारी टेंडर पास होने लगे। जुलाई 1997 में स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के इंजीनियर को बीच सड़क पर गोलियों से भून दिया गया। हत्या में धनंजय सिंह के साथ गुड्डू मुस्लिम को भी आरोपी बनाया गया।

पुलिस की सख्ती होने पर गुड्डूू मुस्लिम गोरखपुर पहुंच गया। इसके बाद वह डॉन परवेज टाडा के लिए काम करने लगा। यहीं पर गुड्डू ने बम बनाने में महारत हासिल की। इसी दौरान परवेज ने गुड्डू की पहचान बिहार के माफिया उदयभान से कराई। साथ ही गुड्डूू के बम बनाने की स्किल की तारीफ की। अब गुड्डूू बिहार में भी लूट, अपहरण, बमबाजी और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने लगा। इसके बावजूद गुड्डू ने परवेज का साथ नहीं छोड़ा था। परवेज के बुलाने पर वह आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए बीच-बीच में गोरखपुर भी जाता था। इसी बीच, वह पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। मुख्तार भी गुड्डू के बम बनाने के तरीके से हैरान रह गया। इसके बाद मुख्तार ने भी उसे अपना खास गुर्गा बना लिया। साल 2001 तक उसने मुख्तार के लिए ही काम किया। इस बीच खुफिया सूचना पर गोरखपुर पुलिस उसे पटना के बेऊर जेल के पास से गिरफ्तार कर लेती है। इसके बाद माफिया अतीक अहमद की एंट्री होती है। अतीक ने तब गुड्डू को जमानत पर जेल से बाहर निकलवाया।

यूपी एसटीएफ के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से मंगवाए गए हथियार पंजाब के रास्ते गुड्डू मुस्लिम ही लाता था। अब गुड्डू अतीक का खासमखास बन गया। 2005 में प्रयागराज पश्चिमी के विधायक राजू पाल की हत्या हो गई। यूपी के सीनियर पुलिस अधिकारी बताते हैं कि गुड्डू ने राजू पाल पर हथगोला उसी तरह फेंका, जिस तरह उसने इस साल फरवरी में राजू पाल मामले के प्रमुख गवाह उमेश पाल की हत्या के दौरान फेंका था। इसी साल 24 फरवरी को राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल की प्रयागराज में उसी के घर के पास दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया। इसमें अतीक के बेटे असद और अन्य आरोपी लगातार उमेश पाल पर गोलियां बरसाते देखे जाते हैं। सीसीटीवी में एक और शख्स दिखाई देता है। वो ब्लैक कलर का छोटा बैग लिए होता है। वह शख्स बारी-बारी से उसमें से बम निकालता है और बड़े आराम से इधर-उधर फेंकते हुए चलता जाता है। ये शख्स दरअसल गुड्डू मुस्लिम ही था। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुड्डू मुस्लिम की सहजता से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह फूल फेंक रहा हो, बम नहीं। उमेश पाल की हत्या में 7 शूटर्स शामिल थे।