डिजिटल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हेट क्राइम व मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवजा राशि देने के लिए समान नीति बनाने और लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया और सुप्रीम कोर्ट ने 8 हफ्ते में केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है।
जनहित याचिका में कहा गया है है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए फैसले के अनुसार मौजूदा पीड़ितों की मुआवजा योजनाओं को उपयुक्त रूप से संशोधित करे, ताकि हेट क्राइम और मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जा सके।
तहसीन पूनावाला फैसले में जारी दिशानिर्देशों में पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना को लागू करने के तरीके को निर्धारित किया था और इसमें शारीरिक चोट की प्रकृति, मनोवैज्ञानिक चोट और कमाई के नुकसान सहित अन्य पहलुओं पर विचार करने को कहा गया था।
इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में हेट क्राइम को लेकर कोई जगह नहीं है और ऐसे अपराधों से लोगों की रक्षा करना राज्यों का प्राथमिक कर्तव्य है। जस्टिस के.एम. जोसेफ और जस्टिस बी.वी. नागरत्न ने कहा था कि हेट स्पीच पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता और कोर्ट ने कहा था कि जब हेट क्राइम के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो एक ऐसा माहौल बनता है जो बहुत खतरनाक होता है तथा इस जड़ से खत्म करने की जरूरत है।