चंडीगढ़/डिब्रूगढ़ :  कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह को पंजाब के मोगा जिले के रोडे से रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। वह 36 दिनों से अधिक समय से फरार था। पंजाब से अमृतपाल (29) को लेकर एक विशेष विमान  डिब्रूगढ़ के मोहनबाड़ी हवाई अड्डे पहुंचा, जहां से उसे डिब्रूगढ़ जिला उपायुक्त विश्वजीत पेगू व पुलिस अधीक्षक श्वेतांक मिश्रा के नेतृत्व में असम पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल ले जाया गया।  अमृतपाल को सुबह 6.45 बजे रोडे में हिरासत में लिया गया। आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले रोडे गांव से था और अमृतपाल को पिछले साल इस गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का प्रमुख नियुक्त किया गया था। अमृतपाल को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया और एक विशेष उड़ान से असम ले जाया गया, जहां उसे डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में रखा जाएगा। इस जेल में पिछले कुछ हफ्तों में उसके नौ अन्य सहयोगियों को ले जाया गया है। गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद एक वीडियो सामने आया, जिसमें कट्टरपंथी उपदेशक एक संक्षिप्त संबोधन देते हुए दिखाई दे रहा है, जिसमें वह संकेत दे रहा है कि वह आत्मसमर्पण कर रहा है। एक अन्य क्लिप में वह भिंडरावाले की तस्वीर के सामने बैठा दिखाई दे रहा है।

भिंडरावाले 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए विवादास्पद सैन्य अभियान में मारा गया था। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुखचैन सिंह गिल ने अमृतपाल के दावे का खंडन किया कि यह ‘आत्मसमर्पण’ था और कहा कि भगोड़े को घेर लिया गया था। उन्होंने कहा कि अमृतसर पुलिस और पंजाब पुलिस की खुफिया इकाई ने एक संयुक्त अभियान चलाया। पंजाब पुलिस को अमृतपाल के रोडे गांव में होने का पता चला था। पुलिस ने गांव में उसे चारों तरफ से घेर लिया था। गिल ने कहा कि पुलिस गुरुद्वारे के भीतर नहीं गई। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे की पवित्रता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण था और वर्दी के साथ पुलिस अंदर नहीं जा सकती थी।  गिल ने बताया कि अमृतपाल को यह संदेश दिया गया था कि उसके भागने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत वारंट जारी किए गए थे और सुबह इन्हें तामील किया गया। कानून अपना काम करेगा। अमृतपाल की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद एक वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य में शांति और सद्भाव को बिगाड़ने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा।

मान ने कहा कि वह रात में लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे। अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे ने दावा किया कि अमृतपाल ने आत्मसमर्पण किया है और उस वक्त वह भी मौजूद थे।  गुरुद्वारे के वीडियो में अमृतपाल यह भी कहता सुनाई दे रहा है कि यह जरनैल सिंह भिंडरावाले का जन्म स्थान है। यह वही स्थान है, जहां मेरा ‘दस्तार बंदी’ (पगड़ी बांधना) समारोह हुआ था। हम जीवन के अहम मोड़ पर खड़े हैं। पिछले एक महीने में जो भी हुआ है, वह सब आपने देखा है। वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है कि एक महीने पहले सिखों के खिलाफ सरकार ने ‘ज्यादती’ की। अगर केवल मेरी गिरफ्तारी का सवाल होता, तो शायद गिरफ्तारी के और भी कई तरीके होते जिन पर मैं सहयोग करता। उसने कहा कि मैंने आत्मसमर्पण का फैसला किया और यह गिरफ्तारी कोई अंत नहीं है, यह एक शुरुआत है। अमृतपाल ने कहा कि ईश्वर की अदालत में, मैं दोषी नहीं हूं, लेकिन दुनिया की अदालत में, मैं दोषी हो सकता हूं।

पंजाब पुलिस ने अजनाला थाने पर हमला करने के बाद 18 मार्च को अमृतपाल और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद से वह फरार था। पुलिस ने खालिस्तान समर्थक के खिलाफ सख्त रासुका लागू किया था। ऐसी आशंकाएं थीं कि अमृतपाल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संबंध थे और वह अलग राष्ट्र ‘खालिस्तान’ की मांग के लिए सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की दिशा में काम कर रहा था। अमृतपाल पिछले साल दुबई से लौटा था और कार्यकर्ता-गायक दीप संधू की मौत के बाद वह ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख बना था। संगठन के घोषित उद्देश्यों में युवाओं को मादक पदार्थों की लत से छुटकारा दिलाना शामिल है, लेकिन खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक दिखावा है। अमृतपाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कथित रूप से वैमनस्य फैलाने, हत्या के प्रयास, पुलिस कर्मियों पर हमले और लोक सेवकों के कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने के लिए कई मामले दर्ज किए गए हैं। अमृतपाल 36 दिन तक फरार रहा। इस बीच, अधिकारियों ने उसके प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार करके उस पर दबाव बनाना जारी रखा।

अमृतपाल ने ब्रिटेन की निवासी किरणदीप कौर से इस साल फरवरी में शादी की थी। हाल में अमृतसर हवाई अड्डे से लंदन जाने वाली एक उड़ान में सवार होने से कौर को रोक दिया गया था। अमृतपाल के कई समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया, लेकिन उनमें से ज्यादातर को रिहा कर दिया गया, क्योंकि अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने दावा किया कि युवाओं को परेशान किया जा रहा है। अमृतपाल के कथित सहयोगियों में से नौ डिब्रूगढ़ जेल में हैं। इनमें दलजीत सिंह कलसी, पपलप्रीत सिंह, कुलवंत सिंह धालीवाल, वरिंदर सिंह जोहाल, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, हरजीत सिंह, भगवंत सिंह, बसंत सिंह और गुरिंदरपाल सिंह औजला शामिल हैं। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में अमृतपाल सिंह को लाने से पहले उसके कमरे और आस-पास कुल बारह सीसी टीवी कैमरे जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए हैं। साथ ही वहां अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती किए जाने की भी सूचना है।