जोरहाट : पानी और जमीन का उचित व्यवहार कर तथा मौसम परिवर्तन के साथ मुकाबला करके कृृषि क्षेत्र को आगे ले जाना होगा। कृृषि क्षेत्र का परिवर्तन वैज्ञानिकों के जरिए संभव है। लेकिन मौसम का परिवर्तन कृृषि क्षेत्र में व्यापक असर डाल रहा है, इसलिए समय रहते इसकी चिंता कर हमें आगे बढ़ना होगा। यह कहना है असम के राज्यपाल तथा असम कृृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपत्ति गुलाब चंद कटारिया का। आज जिले के बरभेटा स्थित एएयू में कृृषि महाविद्यालय की महारजत जयंती के अवसर पर आयोजित चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि विश्व की लगभग अस्सी प्रतिशत खेती बरसात पर निर्भर है।
वहीं मौसम का परिवर्तन जनसंख्या वृद्धि आदि कारणों से खेती की जमीन घटती आ रही है। ऐसी परिस्थिति में अधिक उत्पादन और सुरक्षित खेती पर निर्भर होकर सभी को आगे बढऩा होगा, वहीं कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए फिलीपींस के अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान प्रतिष्ठान के संचालक डॉ. जीन वैली ने सम्मानित अतिथि के रूप में हिस्सा लेते हुए कहा कि विश्व का कोई भी देश मौसम परिवर्तन से अछूता नहीं है। ऐसे में इस दिशा में उचित अनुसंधान के जरिए किसानों को आगे जाना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कृृषि शिक्षा ही कृृषि परिवर्तन क्षेत्र में मुख्य भूमिका लेगी। साथ ही खाद्य व्यवस्था के क्षेत्र में परिवेश तंत्र के अनुसार परिवर्तन लाना होगा। इस दिशा में परिवर्तन लाने के लिए कृृषि विश्वविद्यालयों को पद्धतिबद्ध तरीके से उन्नत बीजों के साथ और अधिक तत्परता से काम करना होगा। साथ ही प्रौद्योगिकी की दिशा में नजर रखनी होगी।
उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेते हुए प्रो. एचएस श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के उपाध्यक्ष डॉ. एन रघुराम ने सोसाइटी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं एएयु के कुलपति डॉ. विद्युत चंदन डेका ने कहा कि प्राकृृतिक संपदों का कम से कम क्षति करके अथवा पुर्नगठन तथा पुर्न व्यवहार द्वारा भविष्य पीढ़ी के लिए दिशा निर्देश करना उचित होगा। डॉ. प्रियदर्शनी भराली के संचालन में उद्घाटन समारोह के अवसर पर प्रकाशित स्मृति ग्रंथ के साथ अन्य चार ग्रंथों का विमोचन किया गया। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. परमजीत खुराना को फाउंडेशन के वर्ष 2020-21 का लीडरशीप पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं एएयू के कृृषि विज्ञानगुरू डॉ. जयंत डेका ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
उल्लेखनीय है कि एएयू के अंतर्गत कृृषि महाविद्यालय के महारजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्व के 21 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मालूम हो कि चार दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान पूरे विश्व दो सौ प्रतिष्ठान द्वारा 950 अनुसंधान पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं आज आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीन वैली ने सम्मेलन के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी के द्वार का उद्घाटन किया। एएयू, जोरहाट कृृषि महाविद्यालय, प्रो. एचएस श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के संयुक्त सौजन्य से आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालय के अध्यापक, छात्र-छात्रा, एनजीओ के कार्यकर्ता, बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रतिनिधि तथा किसान हिस्सा ले रहे हैं।