नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के दीमा हसाओ जिले में सक्रिय जनजातीय उग्रवादी समूह डिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (डीएनएलए) के हिंसा छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने के फैसले को शुक्रवार को पूर्वोत्तर में शांति और प्रगति के लिए 'बहुत अच्छी खबर' बताया। डीएनएलए ने हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए बृहस्पतिवार को केंद्र और राज्य सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। उग्रवादी समूह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की उपस्थिति में सरकार के साथ इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस संबंध में शाह की ओर से किए गए एक ट्वीट के जवाब में मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर की प्रगति और शांति के लिए  यह बहुत अच्छी खबर है। मालूम हो कि डीएनएलए असम के डिमा हसाओ जिले में अधिक सक्रिय है।  डीएनएलए के प्रतिनिधियों ने हिंसा छोड़ने, सभी हथियारों और गोला-बारूद को सौंपने, अपने सशस्त्र संगठन को भंग करने, सभी शिविरों को खाली करने और कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की है।

समूह द्वारा समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, गृह मंत्री ने कहा था कि असम में अब कोई जनजातीय उग्रवादी समूह नहीं है। शाह ने कहा कि इसके साथ, असम में सभी जनजातीय उग्रवादी समूह मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। गृह मंत्री ने समझौते को वर्ष 2024 तक पूर्वोत्तर को उग्रवाद मुक्त बनाने और इसे एक शांतिपूर्ण और समृद्ध क्षेत्र में बदलने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

वहीं डिमासा जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार 500-500 करोड़ रुपए प्रदान करेगी। डीएनएलए ने सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री की अपील के बाद छह महीने की अवधि के लिए एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा की थी, तब से संघर्ष विराम को बढ़ाया जाता रहा।