जामुगुड़ीहाट: असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों की ओर से कदम उठाए जाने के बीच अरुणाचल के लोगों ने असम की धरती पर रातों-रात पोस्टर लगाए हैं। वे असम में असम-अरुणाचल सीमा के पांच किलोमीटर के दायरे में आए और रात में गोहपुर में पोस्टर लगा दिए। एसीपीएफ नामक संगठन ने असम की उस जमीन को खाली करने तक की चेतावनी दी है जहां वे सालों से रह रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि असम और अरुणाचल प्रदेश के दोनों मुख्यमंत्रियों के तत्वावधान में केंद्रीय गृहमंत्री की उपस्थिति में सीमा मुद्दे को हल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर हाल ही में किया गया था। समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ दिन बाद अरुणाचली लोगों द्वारा असमिया लोगों को जमीन छोड़ देने की धमकी दी गई है। गोहपुर अनुमंडल के हेलेम पुलिस थाने व हेलेम राजशाही सॢकल के तहत असम-अरुणाचल सीमा पर संवेदनशील क्षेत्र डफलागढ़ के नलिनीबाड़ी उत्तरी कारीबिल, मंगलबाड़ी और गोशाला समेत कई गांवों के करीब 15 किलोमीटर लंबे मार्ग में बीती रात पोस्टर लगाए गए। एबीपीएफ  के नाम वाले पोस्टरों को डीटीपी कर लेमिनेट किया गया है और गांवों में विभिन्न पेड़ों और दुकानों पर लगाया गया है।

पोस्टर पर टूटी-फूटी हिंदी असमिया अक्षरों में लिखा था, 'अरुणाचल की जगह है, जल्दी खाली करोÓ। सीमा से करीब सात किलोमीटर दूर असम में रातों-रात घुसे पोस्टरों को लेकर व्यापक क्षेत्र में असम के निवासियों में काफी दहशत है। गोहपुर अनुमंडल के डफलागढ़ से लेकर गौशाला तक इस क्षेत्र में काफी संख्या में असमिया लोग रह रहे हैं। असम सरकार के वन विभाग ने जंगली हाथियों के संरक्षण के लिए गोहपुर अनुमंडल के उत्तरी सीमा क्षेत्र हेलेम में सिंगलीजन नामक वन क्षेत्र की स्थापना की। जंगल 1,400 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इस पर अरुणाचल के लोगों का कब्जा है।

अरुणाचल के लोग वर्तमान में असम की अधिकृृत वन भूमि पर चाय और रबर की खेती कर रहे हैं। बीती रात असम सरकार द्वारा अरुणाचल के कब्जाधारियों को वन क्षेत्र से बेदखल करने में विफल रहने के बाद एबीपीएफ ने जल्द ही जमीन खाली करने की धमकी देते हुए पोस्टर लगाए हैं। पोस्टर देखने के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत हेलेम पुलिस स्टेशन और प्रशासन को इसकी सूचना दी।