डिजिटल डेस्क : समलैंगिंक विवाह के मामले पर केंद्र सरकार बिना मान्यता के इस मुद्दे पर विचार करने को तैयार हो गई है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार समलैंगिकों की समस्याओं को लेकर पॉजिटिव है और प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए एक कमेटी बनाएगी,जिसमें उनकी समस्याओं को सुना जाएगा।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली यह समिति समलैंगिकों की समस्याओं को सुनेगी और फिर यह देखेगी कि इन जोड़ों की क्या-क्या समाजिक जरूरतें हैं? इसके बाद वो रिपोर्ट पेश करेगी और जहां तक समलैंगिकों को बीमा, गोद लेने, टैक्स का लाभ देने का मामला है तो इस संबंध में पहले ही समिति बनाई जा चुकी है ।
सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई का छठा दिन है तथा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक जोड़ों की बैंकिंग, बीमा जैसी कई समाजिक आवश्यकताएं हैं और केंद्र को इस पर गौर करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई का छठा दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक जोड़ों की भी बैंकिंग, बीमा जैसी कई समाजिक आवश्यकताएं हैं और केंद्र को इस पर गौर करना चाहिए. जिसके जवाब में मेहता ने कमेटी बनाने की बात कही ।
सिंघवी बोले- कानून में बदलाव की जरूरत:
दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मुद्दे पर और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है और इसके लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता है और जिसके बाद सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि सरकार का कमेटी बनाने का फैसला इस मामले में एक कदम आगे बढ़ने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां तक समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का मुद्दा है तो यह हम तय करेंगे तथा संविधान पीठ यह तय करेगा कि सेम सेक्स मैरिज को मान्यता दी जा सकती है या नहीं और वहीं, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कुछ ना मिले, इससे कुछ पाना उपलब्धि होगी। न्यायालय ऐसी स्थिति नहीं चाहता है जहां कुछ भी हाथ में न हो।
अमेरिका में कानून बदलाव का जिक्र:
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी जा रही थी उस समय संविधान पीठ का हिस्सा जस्टिस एस रवींद्र भट ने याद दिलाया कि अमेरिका के कानून में बदलाव में आधी सदी लग गई थी और अब फैसला आपके आंदोलन का अंत नहीं होगा। वैचारिक क्षेत्र में न्यायालय के क्षेत्र से परे पूरी तरह से विधायी परिवर्तन की आवश्यकता है।