डिब्रूगढ़ : उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ ने कहा है कि हमारे देश के पूर्वोत्तर में जो है, उस जैसा दुनिया के किसी भी कोने में नहीं है। जिस तरह यहां की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक धार्मिक स्थल, यहां राष्ट्रीय पार्क हैं, सेंचुरी हैं, मैं बिना किसी डर और निर्विवाद कह सकता हूं कि देश के इस हिस्से में जो कुछ है, वह दुनिया के किसी कोन में नहीं है। वे आज डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वोत्तर की एक अनोखी संस्कृति है। यहां की सांस्कृतिक विरासत बहुत पुरानी है। यहां की संस्कृति समृद्ध है। यहां पार्क और सेंचुरीज हैं। यहां के धार्मिक स्थल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अपने आप में अनुपम है। उन्होंने कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि हम कामरूप के राजा पृथु जलपेशर के वीर शौर्य को याद करते हैं, जिन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के विध्वंसक बख्तियार खिलजी को हराया था। हम प्रसिद्ध आहोम योद्धा लचित बरफुकन को भी सम्मान के साथ याद करते हैं, जिन्होंने सराईघाट की प्रसिद्ध लड़ाई में मुगल सेनाओं को हराया था।

धनखड़ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के मंदिर हैं, उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों को और अधिक भविष्योन्मुखी, नवोन्मेषी और परिणामोन्मुखी बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और प्रतिस्पर्धा की दुनिया का सामना करने के लिए उन्हें तैयार करने में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की। उपराष्ट्रपति श्री धनखड़ ने कहा कि युवा पीढ़ी चमत्कार कर सकती है अगर उन्हें आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जाए। विश्वविद्यालयों को न केवल पारंपरिक डिग्री पर, बल्कि कौशल आधारित कार्यक्रमों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो समग्र, बहु-विषयक और नौकरी उन्मुख हों। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में  डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय तेजी से प्रगति कर रहा है। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय जी20 विश्वविद्यालय कनेक्ट कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले 75 संस्थानों में से एक था। उपराष्ट्रपति  ने  कहा कि भारत दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र है और किसी को इसकी छवि खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। धनखड़ ने  कहा कि कुछ लोग यह झूठी बात फैलाकर देश के बाहर उसकी लोकतांत्रिक छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में लोगों को उनके अधिकार प्राप्त नहीं हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि जब सब कुछ ठीक चल रहा है, तो किसी को हमारे लोकतंत्र को बदनाम क्यों करना चाहिए?

देश के बाहर और अंदर यह बात क्यों करनी चाहिए कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्य नहीं हैं? मैं पूरे विश्वास से और बिना किसी डर के दावा करता हूं कि भारत आज धरती पर सबसे जीवंत लोकतंत्र है। उपराष्ट्रपति ने छात्रों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और मीडिया से 'देश के राजदूतÓ के रूप में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस तरह के विमर्श का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और हम उन लोगों का समर्थन नहीं कर सकते, जो देश के अंदर और बाहर हमारी विकास यात्रा और लोकतांत्रिक मूल्यों को दागदार कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संसद संवाद, चर्चा और विचार-विमर्श के लिए है और अवरोध तथा हंगामे की जगह नहीं है। दूसरी ओर मौके पर उपस्थित मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह शैक्षणिक जीवन के गौरवशाली अध्याय की सफलता का द्योतक है।

सफल छात्रों को डिग्री प्राप्त करने पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय न केवल राज्य में बल्कि देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक है जो राज्य की शिक्षा और प्रगति को समृद्ध बनाने में योगदान दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता में, बल्कि राज्य में अनुसंधान को बढ़ावा देने में भी अपनी भूमिका निभाई है। विभिन्न अनुसंधान निष्कर्षों में 25 पेटेंट प्राप्त करना अनुसंधान और विकास के क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की सफलता को दर्शाता है। विश्वविद्यालय ने राज्य के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में भी योगदान दिया है। जी-20 प्रेसीडेंसी में 76 शैक्षणिक संस्थानों में से एक के रूप में विश्वविद्यालय की विशेषता वास्तव में विश्वविद्यालय की प्रभावशाली यात्रा का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय को राज्य के शैक्षणिक विकास को आगे बढ़ाने और अपनी शैक्षणिक यात्रा को और अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए अपनी भूमिका को बनाए रखना है। देश के शैक्षणिक कौशल को दर्शाने वाले नालंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन विश्वविद्यालयों की तर्ज पर राज्य के विश्वविद्यालयों को शिक्षा से संचालित राज्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लकीर को बनाए रखना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं।

उल्लेखनीय है कि दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने राज्य की प्रख्यात साहित्यकार निरुपमा बोरगोहेन को डी लिट की डिग्री और जलवायु वैज्ञानिक भूपेंद्र नाथ गोस्वामी को डीएससी की डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह में 1,684 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई, जिसमें 75 छात्रों को पीएचडी, 72 छात्रों को एमफिल की डिग्री शामिल है।  39 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर असम के राज्यपाल और डिबू््रगढ़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गुलाब चंद कटारिया, उपराष्ट्रपति की पत्नी सुदेश धनखड़,   राज्य के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति जितेन हजारिका उपस्थित थे। इससे पहले उपराष्ट्रपति असम की यात्रा पर डिब्रूगढ़ हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां असम के मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्वागत किया। इसके बाद उपराष्ट्रपति ने डिब्रूगढ़ आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।