इस्लामाबाद : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को फौरी तौर पर राहत देते हुए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की एक विशेष पीठ ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें दो सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण जमानत प्रदान कर दी। न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब और न्यायमूर्ति समन रफत इम्तियाज की एक पीठ ने अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई की। इससे एक दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उच्च न्यायालय परिसर से खान की गिरफ्तारी को ‘अवैध और गैरकानूनी’ करार दिया था। उच्च न्यायालय द्वारा खान को जमानत प्रदान करने से करीब दो घंटे पहले ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख खान ने उनकी दोबारा गिरफ्तारी होने की सूरत में देशभर में असंतोष फैलने को लेकर चेतावनी दी थी। पंजाब पुलिस के उनके पास पहुंचने का दावा करते हुए खान ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि ऐसी स्थिति फिर से पैदा हो क्योंकि यह मेरा देश और मेरी सेना है।

अपनी गिरफ्तारी को ‘अपहरण’ करार देते हुए उन्होंने कहा कि जेल ले जाने के बाद उन्हें वारंट दिखाया गया। पीटीआई प्रमुख ने कहा, यह जंगल राज है। खान (70) कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानीय समयानुसार सुबह साढ़े 11 बजे अदालत पहुंचे और उन्होंने बायोमीट्रिक पहचान प्रक्रिया तथा अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं। सुरक्षा कारणों से सुनवाई करीब दो घंटे की देरी से शुरू हुई।  ‘जियो न्यूज’ के अनुसार, एक वकील द्वारा नारे लगाए जाने के बीच दोनों न्यायाधीश न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब और न्यायमूर्ति समन रफात इम्तियाज अदालत कक्ष से बाहर चले गए। नाराज न्यायाधीशों ने बाद में कहा कि सुनवाई जुमे की नमाज के बाद फिर शुरू होगी। ‘डॉन न्यूज’ की खबर के मुताबिक, इमरान के वकीलों ने चार अतिरिक्त अर्जियां दाखिल कीं, जिनमें उच्च न्यायालय से इमरान के खिलाफ सभी मामलों को संबद्ध किए जाने तथा प्राधिकारियों को उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारियां उपलब्ध कराने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

खान को राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) द्वारा उनके खिलाफ एक गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद अल-कादिर मामले में मंगलवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से गिरफ्तार किया गया था। अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामला पंजाब के झेलम जिले के सोहावा क्षेत्र में 2019 में सूफीवाद के लिए अल-कादिर विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित है। खान पर मामले में देश के खजाने से 50 अरब रुपए के गबन का आरोप है। अर्द्धसैनिक रेंजर्स द्वारा उनकी गिरफ्तारी किए जाने के बाद पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिसके चलते इस्लामाबाद के साथ ही पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सेना तैनात करनी पड़ी।

उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखा था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को खान को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी को ‘गैर कानूनी’ करार दिया और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। उसने पुलिस को खान को उच्चतम न्यायालय की सुरक्षा में रखने तथा सुबह 11 बजे उच्च न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार की सुनवाई शुरू होने पर खान के वकील ख्वाजा हारिस ने गिरफ्तारी से संरक्षण की जमानत अर्जी पेश की। बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने खान को दो सप्ताह के लिए जमानत प्रदान की। वहीं, टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में अदालत परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस और रेंजर्स अधिकारी तैनात दिखे तथा प्रवेश द्वार के सामने कंटीले तार लगे नजर आए। उच्च न्यायालय के बाहर के फुटेज में कई वकील खान के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए नारेबाजी करते दिखे। इसके अलावा, उच्च न्यायालय परिसर की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे पीटीआई समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई।