गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने आज मंगलवार को तिनसुकिया में आयोजित 5वें जिला उपायुक्तों के सम्मेलन में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन की शुरुआती बैठक में शामिल राज्य सरकार के मंत्रियों और मुख्य सचिवों सहित शीर्ष अधिकारियों और जिला उपायुक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में असम के लोगों के विकास और नई आशाओं से भरे असम के निर्माण के प्रयासों और सपनों की यात्रा शुरू की है। इस दौरान राज्य सरकार ने कई उपलब्धियां हासिल की है और कई सड़कों की दिशा खींचने में सफल रही है। राज्य सरकार के पिछले दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान दौरान महावीर लाचित बरफुकन की 400वीं जयंती मनाने, बिहू में 11,000 से अधिक बिहुआ-बिहुवती के भाग लेने जैसे कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बोड़ो समझौता, कार्बी समझौता, डिमासा समझौता और आदिवासी समझौते से राज्य में अभूतपूर्व शांति का माहौल बना है और लोगों के अटूट सहयोग से राज्य ने आन्दोलन मुक्त वातावरण हासिल किया है। इसके अलावा राज्य के बड़े क्षेत्रों से अशांति क्षेत्र अधिनियम को वापस ले लिया गया है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में असम में 15,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया और कई निवेश प्रस्ताव उद्योग विभाग द्वारा विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का पूरे राज्य के अवसंरचना विकास पर दूरगामी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार सालाना औसतन 25,000 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय खर्च करने में सक्षम है और केंद्र सरकार को उम्मीद है कि 2023-24 में राज्य की जीडीपी 5,50,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जीएसटी एवं अन्य राजस्व संग्रह की अच्छी पृष्ठभूमि तैयार करने में सफल रही है और राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में धान संग्रहण के प्रयासों को नई गति मिली है। राज्य में चाय उद्योग ने भी पिछले एक साल में अच्छे परिणाम दिखाए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में असम माला परियोजना के क्रियान्वयन, जिलों में लैंड बैंक के निर्माण, मिशन वसुंधरा के क्रियान्वयन आदि में प्राप्त सफलताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक साल में स्वास्थ्य क्षेत्र में तीन मेडिकल कॉलेज खोलना असम के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना साबित हुई है।
उन्होंने कहा कि अरुणोदय योजना, मुख्यमंत्री आयुष्मान असम योजना आदि जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्य पहले ही लक्ष्यों को पार कर चुका है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रदेश के सभी जिलों का समान रूप से विकास की ओर बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस भी जिले में योजना के क्रियान्वयन में पिछड़ा हुआ है, उसके आयुक्त इस संबंध में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले का दौरा करेंगे और देखेंगे कि उस जिले ने कैसे सफलता हासिल की है। अगले छह माह में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव व अभिभावक मंत्री व अभिभावक सचिव लगातार पिछड़े जिलों का दौरा करेंगे और प्रदर्शन में सुधार के लिए विभिन्न पहलुओं पर नजर रखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन में सभी जिलों का समान विकास चर्चा का प्रमुख विषय होगा और प्रशासन के केंद्र के रूप में जिला उपायुक्त अपने कार्यों का निष्पादन कैसे कर सकते हैं, इस पर भी सम्मेलन में विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जानना बहुत जरूरी है कि किसी जिले की आर्थिक गति किस दिशा में जा रही है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने आज तिनसुकिया में नवनिर्मित कांवेन्सन सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया। 15.60 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस सम्मेलन केंद्र में संगोष्ठी कक्ष और अतिथि कक्ष सहित कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कांवेंशन सेंटर में प्रदर्शन के लिए रखे गए चिंगफौ लोगों की पारंपरिक चाय फालाप का स्वाद भी चखा। बैठक में मंत्री रंजीत कुमार दास, अतुल बोरा, यूजी ब्रह्म, केशव महंत, परिमल शुक्लवैद्य, अजंता नेउग, चंद्रमोहन पटवारी, डॉ. रनोज पेगू, योगेन मोहन, संजय किशन, अशोक सिंघल, विमल बोरा, नंदिता गरलोचा और केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली सहित मुख्य सचिव पवन कुमार बरठाकुर तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी उपस्थित थे।