गुवाहाटी : यूूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2022 में असम के मयूर हजारिका ने जहां देशभर में पांचवां स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया,वहीं पूरे पूर्वोत्तर से 20 परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की, उनमें सात असम से, तीन अरुणाचल से, मणिपुर और नगालैंड से चार- चार , सिक्किम और मेघालय से एक-एक परीक्षार्थी सफलता का परचम फहराने में सफल रहे। असम से मयूर हजारिका ने पांचवां स्थान हासिल किया, वहीं अंजलि भारद्वाज ने 271वां, इदुल अहमद ने 298वां, दीक्षा लांग्थासा ने 664वां, निवेदिता दास ने 848 वां और मानसज्योति दास ने 881वां स्थान हासिल किया। अरुणाचल की पेपीका लेगो ने 290 वां, तेंजीन यांगकी ने 545 वां और औस्तीन तायेंग ने 747वां स्थान हासिल किया। नगालैंड के वेवोटोलु केजो ने 387वां, एमकॉनुकला आओ ने 723वां, युमकू ने 203 वां और ओतुला ओजोकुम ने 874वां स्थान मिला। मणिपुर के अरविंद हांगतेम स्थान 83वां, चिंजौंकिंम तुंगनुंग ने 704वां और सिक्किम की दीपिका अग्रवाल ने151 वां और मेघालय के स्वप्निल भट्टाचार्य ने 344 वां स्थान हासिल किया। बन गए हैं। यह असम के लिए बड़ी उपलब्धि है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पहले कभी भी किसी असमिया ने इस तरह से टॉप पांच में जगह नहीं बनाई। इससे पहले यूपीएससी की परीक्षा में असम को सबसे ज्यादा 18वां स्थान मिला था, वह राज्य के वर्तमान मुख्य सचिव पवन बरठाकुर के नाम दर्ज है।
बरठाकुर की उपलब्धि अब तक की यूपीएससी में असम की यह सर्वोच्च रैंक थी। मयूर की इस उपलब्धि को लेकर नगांव में काफी उत्साह है। परीक्षा में बैठकर एक बार में ही यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले मयूर हजारिका ने कहा कि जब वे मेडिसिन की पढ़ाई कर रहे थे तब से यूपीएससी की परीक्षा में बैठना चाहते थे। मयूर ने ग्रामीण चिकित्सक रहते हुए इसके लिए तैयारी की। उन्होंने मीडिया को बताया कि वह ऑनलाइन कोचिंग क्लास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्थान मिलने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन जगह मिलने की उम्मीद जरूर थी। मयूर हजारिका ने कहा कि वह भारतीय विदेश सेवा में जाने को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता में उनके माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने यूपीएससी की मुख्य परीक्षा के लिए रोजाना 10 घंटे तक पढ़ाई की। मयूर हजारिका के माता-पिता को अपने बेटे की सफलता पर गर्व है। मयूर ने 2013 में हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट परीक्षा में डॉनबॉस्को स्कूल,तेजपुर से राज्य में 10वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद मयूर ने 2015 में नगांव स्थित रामानुजन जूनियर कॉलेज से हायर सेकेंडरी फाइनल परीक्षा के विज्ञान संकाय में राज्य में नौवां स्थान प्राप्त किया था।
उनकी इस बड़ी उपलब्धि की खुशी में मंगलवार को नगांव के रामानुजन जूनियर कॉलेज और रामानुजन हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों ने मयूर हजारिका को साथ लेकर नगांव शहर में एक जुलूस निकाला। मयूर हजारिका पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने 2021 में मेडिकल परीक्षा पास की और उसके बाद एक साल के लिए नगांव जिले के जखलाबंधा में एक ग्रामीण डॉक्टर के रूप में काम किया। तेजपुर के माजगांव सैकिया मोहल्ले के रहने वाले कृष्ण हजारिका और मौसमी हजारिका के पुत्र मयूर हजारिका वर्तमान में नगांव शहर के रहते हैं। मयूर की बहन नगांव के रामानुजन जूनियर कॉलेज की छात्रा हैं। अपनी बहन के शैक्षिक कारणों के लिए मयूर अपने माता-पिता के साथ नगांव में किराए के मकान में रहते हैं। मयूर हजारिका के पिता कृष्णा हजारिका लोक निर्माण विभाग में कर्मचारी हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। उनकी सफलता के लिए आज विभिन्न संगठनों ने उन्हें सम्मानित किया। साथ ही सदर विधायक रूपक शर्मा ने भी मयूर को सम्मानित किया। मयूर को सम्मान करते हुए सदर विधायक रूपक ने कहा कि उम्मीद है कि मयूर भविष्य में एक सफल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देश की सेवा करते रहेंगे। सदर विधायक रूपक शर्मा व बुद्धिजीवी समाज ने मयूर हजारिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मयूर ने कहा कि आज परिणाम घोषित होने के बाद परिणाम पाकर खुश हूं।