डिजिटल डेस्क: भारत का पड़ोसी मगर नीयत का खोटा, बड़ी-बड़ी बातें और वादाखिलाफी की फितरत दोस्ती का हाथ बढ़ाकर विस्तारवादी नीति को कायम करना , ये ऐसी पहेली है जिसका जवाब आपके दिमाग में आ गया होगा,वाकई इस देश के बारे में क्या ही कहा जाए। इसकी नीयत में हमेशा दूसरे की जमीन पर कब्जा करना होता है और सिर्फ जमीन नहीं आकाश और समु्द्र पर भी कब्जा करना चाहता है बात कर रहे हैं चीन की, वही चीन जिस पर भारत ने जब-जब भरोसा किया तो बदले में भरोसा टूटा।
2014 में भारत में सत्ता बदली और बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज हुई। प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में कूटनीति सबसे अहम थी। पीएम ने विदेशी दौरे कर कूटनीति स्थापित की। हर देश से अच्छे रिश्ते कायम करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा और शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान की पीएम को न्योता देना इस बात की तस्दीक है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ भी अच्छे रिश्ते देखने के सपने पाले थे मगर बदले में उरी और पुलवामा मिला। चीन से भी भारत ने अच्छे रिश्तों की उम्मीद थी,मगर बदले में गलवान हिंसा मिली।
2014 के बाद चीन को लेकर मोदी सरकार के बड़े फैसले:
1.2017 डोकलाम विवाद: गलवान हिंसा से पहले चीन ने डोकलाम में कब्जा करने की कोशिश की और भारत-चीन और भूटान के बीच विवादित जमीन पर चीन सड़क बनाने की कोशिश कर रहा था।भारत ने मजबूती से इसका विरोध किया और अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए भारत ने चीन को ये दिखा दिया था कि अब ये बदला हुआ भारत है।
2. बॉर्डर इलाकों को मजबूत करना:भारत-चीन की सीमा की भागौलिक स्थितियां चैलेंजिंग थीं और यहां पर आसानी से सेना तक रसद सामग्री नहीं पहुंच पाती थी।सर्दियों के मौसम में ये असंभव ही हो जाता था तथा सियाचिन बॉर्डर पर तापमान -40 डिग्री तक गिरता है। भारत ने उन इलाकों तक रास्ते, पुल, ब्रिज, हवाई अड्डे, हवाई पट्टियां बनानी शुरू कर दी।इससे चीन को चटका तो जरुर लगा, उसने विरोध भी किया,मगर मजबूती से जवाब देता रहा।
3. द्विपक्षीय व्यापार पर रोक:भारत और चीन के बीच आयात-निर्यात संतुलन बिगड़ गया था। सरकार ने चीनी आयात पर टैरिफ बढाए और कई प्रतिबंध भी लागू किए और चीन को समझ आ गया कि दाल यहां गलेगी नहीं। भारत सरकार ने अपने हित को प्राथमिकता देते हुए अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करने और व्यापार घाटे को दूर करने के लिए ऐसा किया गया।
4. मोस्ट फेवर्ड नेशन :2019 को जब कश्मीर में पुलवामा हमला हुआ तो सरकार ने तुरंत पाकिस्तान को दिया MFN का दर्जा वापस ले लिया तथा पाकिस्तान और चीन कट्टर दोस्त हैं। इस फैसले से भारत ने अपना विरोध दर्ज कराया था। इसका उद्देश्य आर्थिक दबाव बढ़ाना और पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करना है।
5. गलवान वैली हिंसा के बाद भारत का प्रतिकार:जब पूरी दुनिया चीन से निकले कोरोना वायरस से जूझ रही थी तब वो अपने देश के लोगों की चिंता करने के बजाय कब्जा करने की सोच रहा था।जून 2020 में गलवान वैली में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की और भारतीय जवानों के पराक्रम के कारण चीनी भागने पर मजबूर हुए। इस घटना में दोनों तरफ के सैनिक हताहत हुए थे तथा इसके बाद भारत ने और मजबूती से सीमा के इलाकों का विकास शुरू किया। सैन्य क्षमताएं बढ़ा दी गईं और राफेल जैसा लड़ाकू विमान तैनात कर दिया था।
6. चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध:चीनी ऐप्स भारत में तेजी से फैलते जा रहे थे. इनके जाल में करोड़ो देशवासी फंस चुके थे और ये एप्स भारत की जानकारी चीन को भेज रहे थे। 2020 में सरकार ने डेटा सिक्योरिटी के नाम पर चीनी एप्स को बैन कर दिया और इसमें टिकटॉक, वीचैट सहित ढेरों एप शामिल थे।
7. आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत:बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक्स समान के लिए हम चीन पर आश्रित थे और इनको रोकना असंभव लग रहा था। 2020 से सरकार ने आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी और चीन के खिलाफ एक सामाजित सोच ने जन्म लिया और लोगों ने चीन के प्रोडक्ट को खरीदना बंद कर दिया। इससे चीन को तगड़ा झटका लगा था और चीन ने बार-बार भारत ने व्यापारिक संबंध बनाने के लिए जोर दिया लेकिन भारत ने साफ इनकार कर दिया।
8.वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम:इसी साल फरवरी में भारत सरकार ने वाइब्रेंट विलेज की शुरुआत की और चीन के लिए ये बड़ा झटका था। जिन इलाकों को चीन अपने कब्जे में बताता था उन्हीं इलाकों के डेवलपमेंट के लिए भारत सरकार ने ये योजना बनाई। चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा मानता है और मोदी कैबिनेट के नए फैसले में इस योजना के लिए 4800 करोड़ का आबंटन किया गया है। इसके तहत भारत-चीन बॉर्डर पर बसे गांव जो कि घोस्ट विलेज में तब्दील हुए उनको वाइब्रेंट बनाया जाएगा।
9. क्वाड एंगेजमेंट:भारत क्वाड देशों का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य है और क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका है। चीन चारों का ही दुश्मन है तथा चीन के इन चारों से ही अच्छे संबंध नहीं है। अब ऐसे में चारों का एक ग्रुप हमेशा से ही चीन को परेशान करता है। चीन और अमेरिका के रिश्ते अभी भी तनाव ग्रस्त है तथा जापान से उसकी पुरानी रंजिश है। भारत पर तो वो दिन रात नजरें गड़ाए रखता है,ऐसे में चीन को घेरने के लिए क्वाड सबसे बड़ा हथियार है।डिजिटल डेस्क: भारत का पड़ोसी मगर नीयत का खोटा, बड़ी-बड़ी बातें और वादाखिलाफी की फितरत दोस्ती का हाथ बढ़ाकर विस्तारवादी नीति को कायम करना , ये ऐसी पहेली है जिसका जवाब आपके दिमाग में आ गया होगा,वाकई इस देश के बारे में क्या ही कहा जाए। इसकी नीयत में हमेशा दूसरे की जमीन पर कब्जा करना होता है और सिर्फ जमीन नहीं आकाश और समु्द्र पर भी कब्जा करना चाहता है बात कर रहे हैं चीन की, वही चीन जिस पर भारत ने जब-जब भरोसा किया तो बदले में भरोसा टूटा।