नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नए संसद भवन का उद्घाटन किया और ऐतिहासिक राजदंड 'सेंगोल' को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित किया। पारंपरिक परिधान में प्रधानमंत्री मोदी ने द्वार संख्या-एक से संसद भवन परिसर में प्रवेश किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मोदी और बिड़ला ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर ईश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए कर्नाटक के श्रृंगेरी मठ के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच 'गणपति होमम अनुष्ठान किया। प्रधानमंत्री ने 'सेंगोल (राजदंड) को दंडवत प्रणाम किया और हाथ में पवित्र राजदंड लेकर तमिलनाडु के विभिन्न अधीनमों के पुजारियों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद 'नादस्वरम्' की धुनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी सेंगोल को नए संसद भवन लेकर गए और इसे लोकसभा कक्ष में अध्यक्ष के आसन के दाईं ओर एक विशेष स्थान में स्थापित किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर और जितेंद्र सिंह, योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ कर्मचारियों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर एक सर्वधर्म प्रार्थना भी आयोजित की गई। प्रधानमंत्री बाद में लोकसभा अध्यक्ष और कुछ अन्य गणमान्य लोगों के साथ पुराने संसद भवन गए। टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से निर्मित नए संसद भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य संविधान हॉल, सांसदों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थान होगा। त्रिकोणीय आकार की चार मंजिला इमारत 64,500 वर्ग मीटर में फैली है। इस इमारत के तीन मुख्य द्वार ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार हैं। इसमें विशिष्ट जन, सांसदों और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार होंगे। नए भवन के लिए उपयोग की गई सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई है। इमारत में इस्तेमाल सागौन की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से मंगाई गई थी,जबकि लाल और सफेद बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से खरीदा गया था।
राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और हुमायूं के मकबरे के लिए बलुआ पत्थर भी सरमथुरा से प्राप्त किया गया था। केसरिया हरे पत्थर को उदयपुर से, लाल ग्रेनाइट को अजमेर के पास लाखा से और सफेद संगमरमर को राजस्थान के अंबाजी से खरीदा गया है। एक अधिकारी ने कहा कि एक तरह से पूरा देश लोकतंत्र के मंदिर के निर्माण के लिए एक साथ आया, जो एक प्रकार से 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की सच्ची भावना को दर्शाता है। लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों में फॉल्स सीलिंग के लिए स्टील का ढांचा केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से मंगाया गया है जबकि नई इमारत का फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया था। इमारत में पत्थर की जाली का काम किया गया है, जिसमें राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा का योगदान है। अशोक स्तंभ के लिए सामग्री महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से मंगाई गई थी जबकि लोकसभा और राज्यसभा कक्षों की विशाल दीवारों और संसद भवन के बाहरी हिस्से में लगे अशोक चक्र को मध्य प्रदेश के इंदौर से खरीदा गया था।
नए संसद भवन में निर्माण गतिविधियों के लिए कंक्रीट मिश्रण बनाने के लिए हरियाणा के चरखी दादरी से 'एम-सैंड' यानी निर्मित रेत का उपयोग किया गया। एम-सैंड को पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह बड़े कठोर पत्थरों या ग्रेनाइट को कुचलकर निर्मित होता है, न कि नदी के तल में निकर्षण द्वारा। निर्माण में इस्तेमाल 'फ्लाई ऐश' ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मंगाई गई थीं, जबकि पीतल के काम और पूर्वनिर्मित खाइयां गुजरात के अहमदाबाद से थीं। 'फ्लाई ऐश' एक बारीक पाउडर है जो तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने से उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। इसमें भारी धातु होते हैं और साथ ही पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन भी होते हैं। नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में 888 सदस्य और राज्यसभा कक्ष में 300 सदस्य आराम से बैठ सकते हैं। दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होने पर कुल 1,280 सदस्यों को लोकसभा कक्ष में समायोजित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी। पुराना संसद भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था। पुरानी इमारत को वर्तमान आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त पाया गया था। लोकसभा और राज्यसभा ने प्रस्ताव पारित कर सरकार से संसद के लिए एक नया भवन बनाने का आग्रह किया था। पुरानी इमारत ने स्वतंत्र भारत की पहली संसद के रूप में कार्य किया और यह संविधान को अपनाने की गवाह भी बनी।
मूल रूप से 'इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल' में स्थित इस संसद भवन को 'काउंसिल हाउस' कहा जाता था। संसद भवन में 1956 में अधिक जगह की आवश्यकता को देखते हुए दो मंजिलों को जोड़ा गया था। वर्ष 2006 में, भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत के 2,500 वर्षों को प्रदर्शित करने के लिए संसद संग्रहालय का निर्माण किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान भवन को कभी भी द्विसदनीय विधायिका को समायोजित करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था और इसमें बैठने की व्यवस्था भी तंग थी। केंद्रीय कक्ष में केवल 440 लोगों के बैठने की क्षमता है और दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों के दौरान अधिक जगह की आवश्यकता महसूस की गई थी।दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष से 100 वर्ष के सफर 'अमृतकाल' की तुलना आजादी मिलने के पहले के 25 सालों से की और देशवासियों का आह्वान किया कि जिस प्रकार उस दौर में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से हर देशवासी जुड़ गया था, उसी प्रकार अगले 25 वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक भारतवासी को जी-जान से जुटना ही होगा।
नए संसद भवन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब करार दिया और कहा कि यह इमारत समय की मांग थी और इसके कण-कण से 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि हर देश के इतिहास में ऐसा समय आता है, जब देश की चेतना नए सिरे से जागृत होती है। भारत में आजादी (1947) के 25 साल पहले ऐसा ही समय आया था। गांधी जी के असहयोग आंदोलन ने पूरे देश को एक विश्वास से भर दिया था। गांधी जी ने स्वराज के संकल्प से हर भारतवासी को जोड़ दिया था। ये वो दौर था, जब हर भारतीय आजादी के लिए जी जान से जुट गया था। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह हुआ कि भारत आजाद हुआ। मोदी ने कहा कि आजादी का ये अमृत काल भी भारत के इतिहास का ऐसा ही पड़ाव है। आज से 25 साल बाद भारत 100 वर्ष पूरे करेगा। हमारे पास भी 25 वर्ष का अमृत कालखंड है। इन 25 वर्षों में हमें मिलकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। लक्ष्य बड़ा है, कठिन भी है, लेकिन हर देशवासी को इसके लिए जी जीन से जुटना ही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के बाद भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की थी और वह यात्रा कितने ही उतार-चढ़ावों से होते हुए कितनी ही चुनौतियों को पार करते हुए आजादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आजादी का यह अमृतकाल विरासत को सहेजते हुए, विकास के नए आयाम गढऩे का अमृतकाल है। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई ने दुनिया के कई अन्य देशों तक में चेतना जागृत कर दी थी और फिर वे आजादी की राह पर चल पड़े, भारत के विश्वास ने दूसरे देशों के विश्वास को सहारा दिया था। उन्होंने कहा कि भारत जैसी विविधता से भरा देश, इतनी बड़ी आबादी का देश... जब आगे बढ़ता है तो दूसरे देशों को प्रेरणा भी मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने संसद भवन में बैठने और प्रौद्योगिकी से जुड़ी समस्याएं थीं और बीते डेढ़ दो दशकों से ये चर्चा लगातार हो रही थी कि देश को नए संसद भवन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सीट व सांसदों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ये समय की मांग थी कि संसद की नयी इमारत का निर्माण किया जाए। नए संसद भवन में विरासत भी है, वास्तु भी है। इसमें कला भी है और कौशल भी है। इसमें संस्कृति भी है और संविधान के स्वर भी हैं।
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के नौ वर्षों के शासन को भारत के नवनिर्माण और गरीब कल्याण का कार्यकाल बताया और कहा कि नया भवन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा, आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा और विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धि होते हुए देखेगा। उन्होंने संसद के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की पीठ के निकट स्थापित 'राजदंड' (सेंगोल) सभी को प्रेरणा देता रहेगा। प्रधानमंत्री ने इससे पहले, सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि संसद के नए भवन का कण-कण गरीब को समर्पित है। मोदी ने कहा कि यह सिर्फ एक भवन नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। यह विश्व को भारत के दृढ़संकल्प का संदेश देता है। यह हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। उन्होंने कहा कि नया संसद भवन योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से और इच्छाशक्ति को क्रियाशक्ति से तथा संकल्प को सिद्धि से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होगा। यह नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का नया माध्यम बनेगा।
यह नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की विकास यात्रा के कुछ पल अमर हो जाते हैं और आज भी ऐसा ही एक दिन है। उन्होंने 'राजदंड' का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी नए संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी, यह 'सेंगोल' हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। मोदी ने कहा कि (सेंगोल) अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक था; हमने इसे उचित सम्मान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए एक संस्कार, एक विचार और एक परंपरा है। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृतकाल विरासत को सहेजते हुए विकास के नए आयाम गढ़ने का नया काल है। मोदी ने कहा कि इस भवन के कण-कण में हमें 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन ने करीब 60 हजार श्रमिकों को रोजगार दिया। उन्होंने कहा कि मुझे गरीबों के चार करोड़ घर बनने का संतोष है। जब हम इस इमारत को देखकर अपना सिर ऊंचा कर रहे हैं, तो मुझे 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण को देखकर भी संतोष है। मोदी ने कहा कि हमारी प्रेरणा एक ही है, देश का विकास, देश के लोगों का विकास। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आदर और उम्मीद के भाव से देख रही है। उन्होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो विश्व आगे बढ़ता है।