गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने मंगलवार को नेताजी समन्वय क्षेत्र,भैरवपुर, चिलापथार में आयोजित ऑल असम बंगाली यूथ स्टूडेंट्स फेडरेशन के 15वें द्विवार्षिक केंद्रीय सम्मेलन और धेमाजी जिला समिति के आठवें द्विवार्षिक अधिवेशन में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली समुदाय विभिन्न ऐतिहासिक और सामाजिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़े असमिया समाज का एक अभिन्न अंग बन गया है। प्रवासन और वैवाहिक संबंधों की नींव पर असम के जातीय जीवन में शामिल होकर असम के बंगाली लोगों ने राज्य की बहुरंगी संस्कृृतियों के साथ असमिया भाषा-साहित्य को समृद्ध करने में अमूल्य योगदान दिया है। असमिया भाषी और बंगाली भाषी असमिया लोगों ने संयुक्त प्रयासों से विश्व दरबार में असमिया जाति ने खुद को सशक्त रूप में स्थापित किया है।
इतिहास के पन्नों में ऐसे कई प्रसिद्ध असमिया भाषी और बंगाली भाषी असमिया व्यक्ति के नाम खुदे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई असमिया साहित्यकारों ने बंगाली में साहित्य चर्चा करके भाषा और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि हलीराम ढेकियाल फुकन, यज्ञराम खारघरिया फुकन, जादूराम डेका बरुवा, मनीराम दीवान ने बंगाली पत्रिका में लिखे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनीराम दीवान के नेतृत्व में असम में शुरू हुए स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में मधु मल्लिक नामक एक बंगाली स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम साहित्य सभा के गठन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महान असमिया विद्वानों के साथ बंगाली विद्वान प्रोफेसर महामहोपाध्याय पद्मनाथ भट्टाचार्य विद्याविनोद शामिल थे। उन्होंने कहा कि चंद्रनाथ शर्मा, अंबिकागिरी राय चौधरी और रत्नकांत बरकाकती की पहल पर बंगाल साहित्य सम्मेलन के मॉडल पर असम साहित्य सम्मेलन का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि बंगाल के एक प्रमुख साहित्यकार रमेश चंद्र दत्त ने ब्रिटिश सरकार को लिखित रूप में सूचित किया था कि असमिया एक स्वतंत्र भाषा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के बंगाली भाषी लोग लगभग 150 वर्ष से भी अधिक समय से असमिया भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैकु बिहारी राय, अम्बिकाचरण घोष, महेंद्रमोहन मित्र, गोपाल कृष्ण डे, हरकिशोर चौधरी, प्रोफेसर लक्ष्मीनारायण चट्टोपाध्याय, राजमोहन नाथ, धीरेन दत्त, योगिराज बसु, हेमांग विश्वास जैसे लेखकों ने असमिया साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर आशुतोष मुखोपाध्याय कलकत्ता विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा में असमिया भाषा की स्थापना करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखोपाध्याय की पहल पर कलकत्ता विश्वविद्यालय में विद्यालय स्तर पर, विशेष रूप से प्रवेशिका परीक्षा में मातृभाषा माध्यम में शिक्षण-अधिगम की पहल के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया था। मैट्रिक में असमिया माध्यम को शामिल करने में प्रमुख व्यक्ति श्यामा प्रसाद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं में असम के विभिन्न स्थानों, नदियों, पहाड़ों, फलों, फूलों, पेड़-पौधों के नामों का उल्लेख है। रवींद्रनाथ टैगोर की कविता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असम में लोकप्रिय थी।
उन्होंने यह भी कहा कि असम के कई कवियों की कविताएं रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं को उनके अर्थ और रूप में प्रतिध्वनित करती हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का असम से गहरा संबंध था। तरुण राम फुकन, कर्मवीर नवीन चंद्र बरदलै, देवेश्वर शर्मा, अमिय कुमार दास और रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाला के साथ नेताजी के संबंध थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस ने 1938 में लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै के नेतृत्व में असम में कांग्रेस मंत्रिमंडल के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार असमिया और बंगाली समुदायों के बीच सद्भाव से काम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बंगाली एससी के लोग भी सदिया में जमीन खरीद सकते हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति के लोग बीटीआर में जमीन खरीद सकते हैं। उन्होंने बंगाली भाषी असमिया समुदाय से वास्तविकता के साथ आगे बढऩे का भी आग्रह किया। उन्होंने असमिया भाषियों से बंगाली भाषियों को दिल से गले लगाने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में रहने वाले बंगाली पिछले दो साल से शांति और सुरक्षा के साथ रह रहे हैैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से सभी को समान अधिकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति के विकास के साथ देश को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने ऑल असम बंगाली यूथ स्टूडेंट्स फेडरेशन से शिक्षा, संस्कृति, खेल आदि के क्षेत्र में बंगाली समुदाय को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाने का भी आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने ज्ञान की खोज के माध्यम से समाज को प्रबुद्ध करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि असमिया और बंगाली समुदायों को असम के विकास के लिए समर्पित होना चाहिए। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु, सांसद प्रदान बरुवा, विधायक भुवन पेगु, रामकृष्ण घोष, अजय कुमार राय, सोनोवाल कछारी स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य टंकेश्वर सोनोवाल, देउरी स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य भैरव देउरी और अखिल बंगाली युवा छात्र संघ के अध्यक्ष दीपक डे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।