गुवाहाटी : सरकार राज्य में एक के बाद एक नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनवा रही है। मुख्यमंत्री ने न केवल हर जिले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनवाने की घोषणा की है, बल्कि मेडिकल कॉलेज के ऊंचे-ऊंचे महलनुमा भवन भी बनवा रहे हैं। लेकिन जहां राज्य में मेडिकल कॉलेज बनाने में रिकॉर्ड बन रहा है उसी समय नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने असम के तीन ऐतिहासिक मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की मान्यता रद्द कर दी है। एनएमसी ने देश के कुल 40 मेडिकल कॉलेजों में से असम के तीन मेडिकल कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है। मुख्य रूप से नेशनल मेडिकल काउंसिल की शर्तों को पूरा करने में विफल रहने के कारण असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़, गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज, गुवाहाटी और फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज, बरपेटा की मान्यता रद्द करने का नोटिस जारी किया गया है। हालांकि उन्हें एक महीने के भीतर नए आवेदन करने का मौका दिया गया है।
एनएमसी टीम ने फील्ड निरीक्षण के दौरान असम के तीनों मेडिकल कॉलेजों में रिक्तियों का खुलासा हुआ है। नतीजतन मेडिकल कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी गई है। एनएमसी पर्यवेक्षकों ने प्रोफेसरों की बायोमेट्रिक फिंगर अटेंडेंस और चेहरे की पहचान की जांच की और पाया कि तीनों मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में प्रोफेसर लंबे समय से अनुपस्थित थे। इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे फेल होने तथा आपातकालीन सेवाओं और कई विभागों में सेवाओं की खराब गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। भले ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मान्यता रद्द कर दी हो लेकिन तीनों मेडिकल कॉलेजों ने इसे रूटीन प्रक्रिया बताया है। एनएमसी पर्यवेक्षकों ने अचानक दौरा किया और कॉलेजों में कई कमजोरियां पाईं। एनएमसी ने पाया कि गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में 30 प्रतिशत प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर अनुपस्थित थे लेकिन गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकारी अब दावा कर रहे हैं कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की टीम ने 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के राष्ट्रीय अवकाश के दिन मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था।
हालांकि, एनएमसी के आरोपों को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और अस्पताल के अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया है। सीएम ने यह कहकर राज्य के लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि तीन कॉलेजों की मान्यता रद्द नहीं की गई है। सीसीटीवी कैमरे खराब होने के कारण आयोग ने शिकायत की थी। सीएम ने इस संबंध में कहा कि मेडिकल कॉलेज में कई सीसीटीवी खराब हैं। इसके कारण चिकित्सा आयोग ने शिकायत की है। यह चिंता की बात नहीं है, इसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत ने मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि यह पारंपरिक नियम है। अब खबर निकल चुकी है इसलिए सभी को मालूम हो गया है। पहले तरह का समाचार नहीं आता था। मंत्री महंत ने कहा कि चिकित्सा आयोग को निरीक्षण में खामियां नजर आती हैं तो शिकायत करते हैं। इस बार सीसीटीवी कैमरे नहीं चलने के कारण उन्होंने शिकायत की। आयोग ने हमें समय दिया है, इसका जवाब समय पर दिया जाएगा।