नई दिल्ली : केंद्र ने मणिपुर में हाल में हुई हिंसा की जांच के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में रविवार को एक जांच आयोग का गठन किया। हिंसा की घटनाओं में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार आयोग तीन मई को और उसके बाद मणिपुर में विभिन्न समुदायों के सदस्यों को लक्षित कर हुई हिंसा और उसके कारणों की जांच करेगा। आयोग उन घटनाओं की ‘कड़ी’ और ऐसी हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि किसी जिम्मेदार अधिकारी/व्यक्ति की ओर से इस संबंध में क्या कोई चूक या कर्तव्य में लापरवाही हुई है? जांच में हिंसा और दंगों को रोकने तथा इससे निपटने के लिए किए गए प्रशासनिक उपायों पर भी गौर किया जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार, किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा आयोग को दी जाने वाली शिकायतों पर भी गौर किया जाएगा। आयोग जितनी जल्दी हो सके केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, लेकिन उसकी पहली बैठक की तारीख से छह महीने के भीतर यह कार्य हो जाना चाहिए। अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग अगर उचित समझे, तो उक्त तिथि से पहले केंद्र सरकार को अंतरिम रिपोर्ट दे सकता है। अधिसूचना के मुताबिक आयोग के अन्य सदस्यों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हिमांशु शेखर दास और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी आलोक प्रभाकर शामिल हैं। गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि तीन मई को मणिपुर में व्यापक स्तर पर हिंसा भड़की, जिसके कारण राज्य के कई निवासियों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। आगजनी में लोगों के घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा तथा कई लोग बेघर हो गए।
अधिसूचना में कहा गया है कि जांच आयोग अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत मणिपुर सरकार ने तीन मई और उसके बाद हुई हिंसा के कारणों और संबंधित कारकों की जांच के लिए 29 मई को एक न्यायिक जांच आयोग के गठन की सिफारिश की थी। अधिसूचना के अनुसार मणिपुर सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह विचार व्यक्त किया कि सार्वजनिक महत्व के मामले, यानी मणिपुर में हिंसा की घटनाओं की जांच करने के उद्देश्य से जांच आयोग नियुक्त करना जरूरी है। अधिसूचना में कहा गया कि सइसलिए केंद्र सरकार जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा तीन द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक जांच आयोग नियुक्त करती है। आयोग का मुख्यालय इंफाल में होगा। तीन मई को जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से ही मणिपुर में छिटपुट हिंसा देखी गई है। अधिकारियों ने कहा कि झड़पों में मरने वालों की संख्या 80 से अधिक हो गई है। मेइती समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी।