इंफाल : मणिपुर में दो दिन तक बवाल शांत रहने के बाद शुक्रवार को एक बार फिर से हिंसा का दौर शुरू हो गया। एक महिला समेत तीन लोगों की शुक्रवार को हुई हिंसा में मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में अब तक मरने वालों की संख्या 105 हो गई है। मैतई और कुकी समुदाय के बीच छिड़ा संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। मई के आखिरी सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मणिपुर पहुंचे थे और कई दिनों तक डटे रहे थे। तब कुछ शांति का माहौल बना था और बीते दो दिनों में कोई हिंसक वारदात नहीं हुई थी। लेकिन शुक्रवार को तनावपूर्ण शांति एक बार फिर से उपद्रव में तब्दील हो गई। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को एकदम तड़के ही कुकी बहुल गांव खोकेन में हिंसा शुरू हो गई थी। यह गांव कांगपोक्पी और इंफाल पश्चिम जिलों की सीमा पर स्थित है। एक अधिकारी ने बताया कि गांव में हुई हिंसा के चलते दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। एक मौत इलाज के दौरान हुई। यह घटना जहां हुई है, वह कुकी बहुल गांव है, जबकि पुलिस फिलहाल मैतई बहुल गांवों में ही तैनात की गई है। इस हिंसा के बाद राज्य में मैतेई बनाम कुकी का संघर्ष और तेज हो गया है।

इंडिजिनियस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने आरोप लगाया है कि यह हमला मैतई उग्रवादी संगठनों के लोगों की ओर से हुआ है। एक नेता ने कहा कि इस इलाके में सेना तैनात थीं। लेकिन जब हमला हुआ वे मौके पर नहीं थीं। इस घटना ने एक बार फिर से मणिपुर प्रशासन की चिंताओं को बढ़ा दिया है। पूर्वोत्तर के इस राज्य में 53 फीसदी आबादी मैतई समुदाय के लोगों की है, जो मूल रूप से घाटी में बसे हैं। इसके अलावा 16 फीसदी कुकी समुदाय के लोग हैं, जिनकी अधिकतर आबादी पहाड़ी क्षेत्रों में ही बसी है। मैतई समुदाय को एसटी का दर्जा दिए जाने पर विचार करने के हाई कोर्ट के सुझाव के बाद से राज्य में हिंसा शुरू हुई थी। इस प्रस्ताव का कुकी समुदाय ने विरोध किया था और वे लगातार इसके लिए आंदोलन कर रहे थे। ऐसे ही एक मार्च के दौरान 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़क गई थी और तब से अब तक हालात नियंत्रित नहीं हो सके हैं। अब तक इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोग मरे हैं तो 40 हजार को अपना घर छोड़ना पड़ा है। 300 लोग जख्मी भी हुए हैं।  वहीं जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान कम से कम 57 हथियार और हथियारों के गोदाम बरामद हुए हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजधानी इंफाल को असम और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मणिपुर में आवश्यक सामानों की मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

अधिकारी के मुताबिक, बृहस्पतिवार को संयुक्त तलाशी अभियान के दूसरे दिन अलग-अलग तरह के 57 हथियार, गोला-बारूद व हथियारों के गोदाम बरामद हुए।  उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम) लागू नहीं है, वहां तलाशी अभियान के दौरान मजिस्ट्रेट भी मौजूद थे। अधिकारी के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान पर्याप्त उपाय किए जा रहे हैं, जिसका मकसद हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी के साथ-साथ समुदायों के बीच तनाव को कम करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थानीय आबादी को असुविधा न हो।  दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय ने जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में इंटरनेट पर लगातार जारी प्रतिबंध के खिलाफ राज्य के दो लोगों की ओर से दायर की गई याचिका पर शुक्रवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बेस और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाश पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के पास भी ऐसा ही एक मामला है।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय मामले की सुनवाई कर रहा है। कार्यवाहियों के दोहराव की जरूरत क्या? नियमित पीठ के पास जिक्र करिए। अधिवक्ता शादान फरासत ने पीठ के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। उच्चतम न्यायालय सी विक्टर सिंह तथा एम जेम्स की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कहा गया था कि प्रतिबंध, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार तथा इंटरनेट को संवैधानिक रूप से संरक्षित माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर कोई व्यवसाय या कारोबार चलाने के अधिकार में हस्तक्षेप करता है। गौरतलब है कि मंगलवार को मणिपुर सरकार ने इंटरनेट पर प्रतिबंध 10 जून तक के लिए बढ़ा दिया था।