नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि यदि दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता नहीं मिलती है तो यह इस वैश्विक संगठन की ‘नैतिक वैधता को कमजोर’ करेगा। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के 75 वें साल पर यहां आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र के निकायों को और अधिक लोकतांत्रिक एवं हमारे समय की हकीकतों का द्योतक बनाया जाए। उन्होंने इस कार्यक्रम में मंच पर आसीन संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक शोम्बी शार्प की उपस्थिति में यह बात कही। सिंह ने यह भी कहा कि यदि हम अतीत का स्मरण करते हैं तो हमें भविष्य की ओर भी देखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पूरे संयुक्त राष्ट्र परिवेश पर नजर डालना महत्वपूर्ण है और यह देखने की जरूरत है कि उसमें सुधार लाने के लिए क्या किया जा सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक सबसे अहम सुधार, निर्णय लेने वाले संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों , जिनमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है, उन्हें दुनिया की लोकतांत्रिक वास्तविकताओं का और अधिक द्योतक बनाया जाए। फिलहाल सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य और 10 निर्वाचित अस्थायी सदस्य होते हैं। स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं जबकि अस्थायी सदस्य दो साल के लिए निर्वाचित होते हैं। भारत ने पिछले साल दिसंबर में इस परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में दो साल का अपना कार्यकाल पूरा किया था। सिंह ने कहा कि यदि दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट नहीं मिलती है तो यह संयुक्त राष्ट्र की नैतिक वैधता को कमजोर करेगा।