इंफाल : मणिपुर में हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। रुक-रुक कर हिंसा भड़क रही है। इस बीच, एक बार फिर शनिवार देर रात बिष्णुपुर जिले में फायरिंग में तीन मैतई वॉलंटियर की मौत की खबर है। यह घटना बिष्णुपुर जिले के खुम्बी थाना अंतर्गत लींगंगताबी पुलिस आउट पोस्ट के पास, लिंगंगताबी आवासीय विद्यालय में हुई। सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार देर रात करीब 12.30 बजे उत्तर पश्चिम दिशा से गोलीबारी की आवाज सुनी गई। इसके बाद रात करीब 02.20 बजे, डंपी हिल क्षेत्र से अज्ञात हथियारबंद बदमाशों, संदिग्ध कुकी विद्रोहियों ने वहां तैनात वीडीएफ/पुलिस कमांडो की ओर गोलीबारी शुरू कर दी। वीडीएफ/पुलिस कमांडो ने इसका जवाब दिया।

रात भर वीडीएफ/पुलिस कमांडो और संदिग्ध कुकी उपद्रिवियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी चलती रही। जानकारी के मुताबिक इस दौरान मैतई वॉलंटियर जो खोइनुमंतबी चिंगथक में बंकर में पोजिशन ले रहे थे, उन्हें कुकी उपद्रवियों से गोलीबारी का सामना करना पड़ा। गोलीबारी की घटना के बाद तीन मैतई वॉलंटियर खोइजुमंतबी चिंगथक बंकर में मृत पाए गए। मृतकों की पहचान निंगोमबम इबोमचा (34) लीकाई के इबोटोन, हाओबाम इबोचा (41) चिंग्या और नाओरेम राकेश (26) चिंग्या के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल स्थिति पूरी तरह काबू में है। सेना, पुलिस और सुरक्षबलों ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।  पूर्वोत्तर राज्य में मैतई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी। मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मैतई समुदाय की है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहती है। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और यह मुख्यतः पर्वतीय जिलों में रहती है।