डिजीटल डेस्क: बंबई हाई कोर्ट का कहना है कि नियम बनाते समय मंशा भले ही कितनी अच्छी क्यों न हो, अगर ऐसे किसी नियम या कानून का असर असंवैधानिक है तो उसे हटा दिया जाना चाहिए, साथ ही कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि आपके पास पीआईबी है तो फिर फैक्ट चेक यूनिट की दरकार क्यों है।

सूचना प्रौद्योगिकी नियमों (IT Rules) में बदलाव को लेकर चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फाइनल सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम एस पटेल और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि केंद्र सरकार इस पर कुछ नहीं कह रही कि फर्जी खबरों की पहचान करने तथा उन पर कार्रवाई करने को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में बदलाव की जरूरत किसलिए है।

किन-किन ने दायर की याचिका:

आईटी नियमों में संशोधन की वजह से केंद्र को सोशल मीडिया में सरकार के खिलाफ फर्जी खबरों (फेक न्यूज) के बारे में फैक्ट चेक यूनिट (FCU) के जरिए पहचान करने का अधिकार मिल गया है।

स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, न्यू ब्रॉडकास्ट एंड डिजिटल एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स ने आईटी नियमों में किए गए संशोधनों को नियमों के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए उन्हें मनमाना और असंवैधानिक बताया था और इन याचिकाओं में यह दलील दी गई कि संशोधित नियमों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर बेहद खतरनाक असर पड़ेगा।

‘अभिभावक का रोल निभाना चाहती है सरकार’:

इस साल अप्रैल में आईटी नियमों में किए गए संशोधन के अनुसार, एफसीयू की ओर से “नकली या भ्रामक” के रूप में चिह्नित किए गए कंटेंट को ऑनलाइन इंटरमीडिएटर्स के जरिए हटाना होगा यदि वे अपना “सेफ हॉर्बर” (थर्ड पार्टी कंटेंट के खिलाफ कानूनी प्रतिरक्षा) बनाए रखना चाहते हैं।

बेंच ने सुनवाई के दौरान यह सवाल किया कि क्या प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) का मैकेनिज्म, जो लंबे समय से चल रहा है, क्या इतना अपर्याप्त है कि इसमें एफसीयू को शामिल करने को लेकर संशोधन करने की जरुरत है।

कॉमेडियन कामरा की ओर से कोर्ट में पेश वरिष्ठ वकील नवरोज सीरवई ने सुनवाई के दौरान कहा कि संशोधित नियम के जरिये केंद्र सरकार की मंशा यह है कि मेरी बात मानो, या फिर निकल जाओ. उन्होंने दलील देते हुए कहा, ‘सरकार कह रही है कि वह यह तय करेगी कि सोशल मीडिया में वही चीज आए जो उसे पसंद हो या फिर जिसे वह सच मानती है।’ उन्होंने आगे कहा कि सरकार आम जनता के लिए माता-पिता या फिर अभिभावक का रोल निभाना चाहती है।

अब बदलाव की जरुरत क्योंः HC

कामरा के वकील ने कहा कि यह संशोधित नियम के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है और कोर्ट को यह सोचना होगा कि क्या इसके प्रभाव असंवैधानिक हैं तथा इस पर जस्टिस पटेल ने कहा, ‘भले ही मंशा अच्छी क्यों न हो, अगर यह असंवैधानिक हुआ तो उसे हटाना ही होगा।'

बेंच ने कहा कि केंद्र ने माना है कि पीआईबी लंबे समय से फर्जी खबरों पर नजर रख रही है। जस्टिस पटेल ने कहा, ‘जब कभी पीआईबी की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो हर न्यूज चैनल और अखबार उसे प्रसारित करते हैं और हमें इस मामले में केंद्र से कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला कि आखिर इसमें बदलाव की जरूरत क्यों है। अगर यह व्यवस्था अच्छे तरीके से काम कर रहा है तो नियमों संशोधन की जरुरत क्यों है? हमें जानना है, लेकिन केंद्र की ओर दायर हलफनामा में इस संबंध में कोई जिक्र नहीं किया गया है।’