गुवाहाटी : असम में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय में एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई। राज्य के 11 विपक्षी दलों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के कार्यालय में प्रवेश से रोक दिया गया। आखिरकार प्रतिनिधिमंडल ने आयोग कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने धरना दिया। गौरतलब है कि गुरुवार रात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खडग़ेे से मुलाकात के बाद विपक्षी राजनीतिक दलों के संयुक्त मंच की ओर से निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपने की बात थी। इसलिए कांग्रेस, वाम दलों और असम जातीय परिषद के लगभग 30 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल दोपहर में दिल्ली के पटेल चौक स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में दाखिल हुआ।

सुरक्षा बलों ने विपक्षी नेताओं को कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया सुरक्षा बलों ने विपक्ष को कार्यालय के स्वागत कक्ष में ज्ञापन सौंपने की सलाह दी। नाराज प्रतिनिधिमंडल ने तो पहले अपना गुस्सा जाहिर करते हुए बहस करने लगा। लेकिन बाद में सदस्यों ने प्रवेश द्वार के सामने बैठकर चुनाव आयोग हाय हाय, भाजपा चुनाव आयोग भाई भाई और हमारी मांगें पूरी होनी चाहिए जैसे नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रतिनिधिमंडल में एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन बोरा, कांग्रेस विधायक दल के नेता देवव्रत सैकिया, उपनेता रकीबुल हुसैन, सांसद गौरव गोगोई, प्रद्युत बरदोलोई शामिल, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष कमलाक्ष दे पुरकायस्थ, राइजर दल के विधायक अखिल गोगोई, सीपीआई (एम) के मनोरंजन तालुकदार, एजेपी के लुरिनज्योति गोगोई, सांसद अजीत भुइयां सहित राज्य के कई विधायक शामिल थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पूरे मामले पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए  पत्रकारों के सामने कहा चुनाव आयोग वास्तव में भाजपा द्वारा चलाया जाता है।

अन्यथा, राज्य के लगभग सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को चुनाव आयुक्त से मिलवाने में क्या कठिनाई थी? शायद उन्हें मोदी सरकार से कुछ निर्देश मिले थे। इसी तरह का बयान सांसद गौरव गोगोई ने भी दिया। गोगोई ने सवाल उठाया, अगर विपक्ष की जगह सत्ता पक्ष का कोई प्रतिनिधि आता तो क्या चुनाव आयुक्त आज उनसे नहीं मिल सकते थे? चुनाव आयोग को पहले ही सूचित कर दिया था कि हम उनसे मिलेंगे लेकिन आयोग के कोई भी उच्च स्तरीय अधिकारी आज मौजूद नहीं थे। मनोरंजन तालुकदार ने सवाल उठाया कि किसके आदेश पर आयोग विपक्ष से भाग रहा है? उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के खिलाफ जन आंदोलन चलाया जाएगा। एजेपी नेता लुरिनज्योति गोगोई ने कहा, राज्य के सभी दलों और बुद्धिजीवियों को आज की घटना की जानकारी दी जाएगी। सड़क पर संघर्ष के साथ न्यायिक संघर्ष भी होगा।

सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कई जनहित याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इस मामले पर जल्द ही सुनवाई होगी। उन्होंने हाल ही में प्रकाशित निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण के मसौदे को मूल निवासियों के लिए ढाल नहीं बल्कि विनाश का दस्तावेज बताया। बिना किसी अधिकारी से मिले प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि विपक्षी दल मुख्य रूप से 2001 की जनगणना के आधार पर असम के निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण का विरोध कर रहे हैं और चल रही प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं।