जोरहाट : ऊपरी असम के चराईदेव जिले में चाय बागान मालिकों को अल्फा (आई)की ओर से  डिमांड नोट भेजे जाने के मामले पर मुख्यमंत्री ने आज मंगलवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कोई अल्फा नहीं है, वे डुप्लीकेट अल्फाई हैं। बागानों के मालिकों को इस तरह की बात का प्रचार नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें कुछ देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति में चाय बागान मालिकों  से डिमांड करना समझ से परे है। कारण कि इन दिनों बागान मालिकों की हालत अच्छी नहीं है। वे इस सि्ेथति में नहीं हैं कि किसी को कुछ दे सकें। उन्होंने कहा कि अगर बागान मालिकों से कुछ लेने के लिए जाते हैं तो उल्टा उन्हें देकर आना पड़ेगा। सीएम ने उदाहरण के तौर पर कहा कि सरकार भी अगर बागान मालिकों के पास रिलीफ फंड के लिए  कुछ राशि लेने पहुंचती है तो वहां जाकर उनके सामने यथास्थिति सामने आ जाती है। यहां पहले से बागान इलाकों में सड़क, पानी व अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है।

उल्लेखनीय है कि सीएम ने अपने दो दिवसीय जोरहाट दौरे के दूसरे दिन विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि  गुवाहाटी के बाद अब जोरहाट में  दूसरे संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। साथ ही चाउलुंग चुकाफा समन्वय क्षेत्र के विकास तथा बुनियादी ढाचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने चाउलुंग चुकाफा को राज्य का पिता करार देते हुए स्वर्गदेव चुकाफा की राजनीतिक, अर्थनैतिक, सामाजिक और सांगठनिक काबिलयत के बारे में चर्चा की।  उनका कहना था कि चाउलुंग चुकाफा ने राज्य की सभी जाति-जनगोष्ठी को लेकर असम तथा असमिया जाति का गठन किया था। उन्होंने कहा कि मध्य युग में असम में दो बड़े परिवर्तन हुए थे। इनमें चाउलुंग चुकाफा द्वारा असम में प्रवेश करने के बाद इस क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न जाति-जनगोष्ठी को एकत्रित कर  असम की स्थापना करने के साथ एक संगठित जाति के रूप में असमिया समुदाय को प्रतिष्ठित किया था, वहीं महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव ने भी असम में भक्ति आंदोलन के जरिए यहां रहने वाले सभी वर्ग तथा जाति के लोगों को साथ में लेकर असमिया जाति का गठन किया था।

मुख्यमंत्री का कहना था कि आहोम शासन काल के सबसे बड़े युद्ध के रूप में सराईघाट के युद्ध को माना जाता है। महावीर लाचित बरफुकन ने अपनी चतुराई तथा बाहुबल से मुगल को पराजित किया था। इसके जरिए असमिया जाति सुरक्षित होने के साथ इस्लामिक अतिक्रमण से सिर्फ देश व जाति की रक्षा ही नहीं की, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृृति को भी सुरक्षित किया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्वर्गदेव चाउलुंग चुकाफा समन्वय क्षेत्र के निर्माण में पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और समाजसेवी देवकुमार बोरा के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने समन्वय क्षेत्र में राज्य संग्रहालय के अन्य एक परिसर को स्थापित करने की घोषणा करते हुए कहा कि इस संग्राहालय में आहोम युगों के विभिन्न ऐतिहासिक संपदाओं को रखा जाएगा। अपने संबोधन में उन्होंने चुकाफा समन्वय क्षेत्र में स्थापित की गई आर्ट गैलरी को भी सराहा जहां पर स्वर्गदेव चाउलुंग चुकाफा के जीवन की विभिन्न घटनाओं को अंकित करके रखा गया है। सीएम ने जानकारी दी कि होलोंगापार स्थित लाचित बरफुकन मैदाम परिसर में निर्माणाधीन सांस्कृृतिक प्रकल्प में महावीर लाचित की 125 फुट ऊंची मूर्ति स्थापित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि 124 करोड़ रुपए की लागत से आहोम युगों के अहम कृृर्ति चिन्ह रंगघर, तलातल घर आदि को नया रूप देकर सुरक्षित करने की परिकल्पना की जा रही है।  उधर  मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने पत्रकारों की ओर से युनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर पूछे गए सवाल का जबाव देते हुए कहा कि यूसीसी केंद्र सरकार लाएगी। इसके चलते बहु विवाह को बंद करने के प्रयास में असम सरकार भी जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि यूसीसी का मतलब है कि बहु विवाह बंद होना चाहिए और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमारे समाज में अधिकतर मुस्लिम महिलाएं इसमें काफी पिछड़ी हुई हैं। मुस्लिम महिलाओं के उत्थान के लिए बहु विवाह बंद करना और संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलना चाहिए था, वह पिछले 75 वर्षों से नहीं हो पाया। साथ ही उन्होंने कहा कि आजादी के अमृतकाल में इस कार्य को पूरा कर लेना चाहिए।सभा के दौरान सांसद तपन कुमार गोगोई, राज्यसभा सांसद कामाख्य प्रसाद तासा, पवित्र मार्घेरिटा, विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी, भवेंद्रनाथ भराली, रूपज्योति कुर्मी, तरंग गोगोई, सांस्कृृतिक सचिव मिनाक्षी दास, जिला उपायुक्त पुलक महंत सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।