गुवाहाटी : चुनाव आयोग की ओर से तैयार निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण का मसौदा एक सकारात्मक शुरुआत है। आसू पहले से ही निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण की मांग कर रहा है। इस संदर्भ में आसू के मुख्य सलाहकार एवं असम उन्नति सभा के अध्यक्ष डॉ. समुज्जल भट्टाचार्य ने आज कहा कि  मैं 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का स्वागत करता हूं। दरअसल, 1991 की जनगणना के अनुसार निर्वाचन क्षेत्र के नए स्वरूप का मसौदा तैयार किया जाना चाहिए था। बुधवार को शहीद न्यास में एक संवाददाता सम्मेलन में डॉ. भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग को निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करना चाहिए या नहीं इस पर बहस करने की कोई जरूरत नहीं है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चुनाव आयोग उन चार राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करेगा जिनका पुनर्निर्धारण बाकी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग थी कि मूल निवासियों की संप्रभुता और निर्णायक अधिकारों को हमेशा के लिए संरक्षित किया जाना  चाहिए।

मसौदे पर अपना विचार 11 जुलाई तक देना था। मैं उसी हिसाब से अपना विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह चुनाव आयोग के लिए एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन इस संबंध में कुछ सुधार की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मूलनिवासियों का वर्चस्व एवं निर्णायक भूमिका सदैव कायम रहे। आसू के कार्यवाहक अध्यक्ष उत्पल शर्मा और महासचिव शंकरज्योति बरुवा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने हाल ही में असम में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के हिस्से के रूप में मसौदा जारी किया है। आयोग ने जनता से 11 जुलाई तक मसौदे पर अपने विचार प्रस्तुत करने को कहा। आसू ने चुनाव आयोग को लिखित रिपोर्ट भेज दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के असम दौरे के दौरान आसू आयोग से मुलाकात करेगा और अपनी बात रखेगा। यहा उल्लेखनीय है कि असम में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण के मुद्दे पर 27/03/2023 को मुख्य चुनाव आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में अखिल असम छात्र संस्था के विचारों को विस्तार से बताया गया था।

छात्र संघ ने 2001 की जनगणना के आधार पर असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया का स्पष्ट रूप से स्वागत किया है। आसू के अनुसार असम में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण का मुद्दा भारत के अन्य राज्यों से अलग है। विदेशी नागरिकों का अवैध अतिक्रमण असम के मूल लोगों की पहचान के लिए खतरा है। असम दौरे पर आए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से मुलाकात के दौरान छात्र संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि असम निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्निर्धारण असम के स्वदेशी लोगों के लिए सुरक्षा उपायों में से एक है। इसलिए अखिल असम छात्र संघ असम में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण चाहता है ताकि मूल लोगों को असम में संप्रभुता प्राप्त हो और असम के मूल लोगों के निर्णायक अधिकार हमेशा के लिए सुनिश्चित हो सके। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करते समय असम की जनसांख्यिकी विस्फोट को ध्यान में रखा जाना चाहिए।