गुवाहाटी : भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज बुधवार से असम के परिसीमन प्रस्ताव पर अपनी सार्वजनिक सुनवाई शुरू की। चुनाव आयोग की टीम में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार सहित चुनाव आयुक्त अनुप चंद्र पांडे और अरुण गोयल शामिल हैं। वे शुक्रवार तक तीन दिनों में राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और समाज के अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ बात करेंगे। चुनाव विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तीन अलग-अलग सभागारों में एक साथ सुनवाई चल रही है तथा कुमार, पांडे और गोयल लोगों के सुझावों को सुनने के लिए एक-एक सभागार में बैठे हैं। इस जन सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों, प्रबुद्ध वर्ग समेत विभिन्न पक्षकारों के साथ परिसीमन प्रक्रिया के मसौदा प्रस्तावों पर बैठक एवं चर्चा करेगा, जो 2001 की जनगणना के आधार पर किया जा रहा है। ईसीआई ने कहा कि जून 2023 में प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद 11 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। इस अवधि के दौरान 780 से अधिक अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। सार्वजनिक सुनवाई परिसीमन प्रक्रिया के दौरान आयोग द्वारा परामर्शी अभ्यास का हिस्सा है। पहले दिन कामरूप मेट्रोपोलिटन, पश्चिम कार्बी आंग्लांग, चिरांग, बाक्सा, दीमा हसाओ, कामरूप, उदालगुड़ी, कार्बी आंग्लांग और कोकराझाड़ जिलों के सुझावों को सुना गया। इन क्षेत्रों से ईसीआई को 270 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, वहीं ग्वालपाड़ा, बंगाईगांव, बरपेटा, नलबाड़ी, शोणितपुर, करीमगंज, दरंग, हैलाकांडी, कछार, दक्षिण सालमारा, नगांव, मोरीगांव और धुबड़ी के लिए मसौदे पर बृहस्पतिवार को फीडबैक ली जाएगी।  इन जिलों से 400 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।

आखिरी दिन निर्वाचन आयोग तिनसुकिया, धेमाजी,  लखीमपुर, शिवसागर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, चराईदेव, गोलाघाट और माजुली जिलों के आवेदनों पर गौर करेगा। इन क्षेत्रों से 95 से अधिक प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अलावा, विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों से छह सुझाव प्राप्त हुए हैं। असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मंगलवार को सभी सार्वजनिक संगठनों से अनुरोध किया था कि वे प्रत्येक समूह के लिए प्रतिनिधियों की संख्या अधिकतम पांच लोगों तक सीमित रखें। असम में अंतिम परिसीमन प्रक्रिया 1971 की जनगणना के आधार पर 1976 में हुई थी। मालूम हो कि मसौदा प्रस्ताव के प्रकाशित होने के बाद से विपक्षी राजनीतिक दलों एवं कई सामाजिक संगठनों ने निर्वाचन आयोग की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि केंद्रीय चुनाव निकाय ने सत्तारूढ़ भाजपा की ‘कठपुतली’ की भांति काम किया है। लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस आरोप पर कोई जवाब नहीं दिया। कई राजनीतिक दल पूरी परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ उच्चतम न्यायालय भी पहुंच गए हैं। निर्वाचन आयोग ने 20 जून को परिसीममन मसौदा दस्तावेज जारी किया तथा असम में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 126 तथा लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 14 बरकरार रखी। राज्य में राज्यसभा की सात सीट हैं। मसौदे के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट आठ से बढ़ाकर नौ तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट 16 से बढ़ाकर 19 कर दी हैं। लोकसभा की दो सीट अनुसूचित जनजाति तथा एक सीट अनूसूजित जाति के लिए आरक्षित की गई है। निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन क्षेत्रों (विधानसभा एवं लोकसभा क्षेत्रों) की भौगोलिक सीमाओं में बदलाव की योजना बनाई है। उसने कुछ सीट हटा दी हैं तथा कुछ नई सीट सृजित की हैं। ईसीआई की एक टीम ने पहले भी 26-28 मार्च को असम का दौरा किया था और परिसीमन अभ्यास के संबंध में राजनीतिक दलों, जन प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों, सामाजिक संगठनों, जनता के सदस्यों और अधिकारियों के साथ बातचीत की थी।